25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ जैसे शुभ कार्य रहेंगे बंद
20 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ फिर शुरू होंगे मांगलिक कार्य
ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक शास्त्री ने बताई धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यता
भारत@साबिर खान fm
यदि आप जुलाई के बाद शादी, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ या किसी अन्य मांगलिक कार्य की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 25 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले देवशयनी एकादशी के साथ ही चार महीने के लिए सभी प्रमुख मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। अब विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए लोगों को 20 नवंबर 2026 यानी देवउठनी एकादशी तक इंतजार करना होगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक शास्त्री के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में चार माह की योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु सृष्टि का संचालन भगवान शिव को सौंपते हैं और इसलिए विवाह सहित नए शुभ कार्यों के लिए पंचांग में कोई शुभ मुहूर्त नहीं माना जाता।
डॉ. शास्त्री ने बताया कि इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन (जनेऊ), नए मकान की नींव, नए व्यापार का शुभारंभ और अन्य मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते। उनका कहना है कि यह समय भक्ति, साधना, संयम और आत्मचिंतन के लिए सर्वोत्तम माना गया है। उन्होंने यह भी बताया कि चातुर्मास का वैज्ञानिक महत्व भी है। वर्षा ऋतु के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से संक्रामक बीमारियों का खतरा अधिक रहता है और पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। इसलिए इस अवधि में व्रत, सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाने की परंपरा स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी मानी जाती है।
डॉ. अशोक शास्त्री के अनुसार, 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागेंगे और इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगा विराम समाप्त हो जाएगा। पंचांग के अनुसार 21, 22, 23, 24, 28 और 29 नवंबर को विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान जप, तप, व्रत, दान, हवन और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है। इस अवधि में किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।






























