आरटीआई में उजागर हुआ नपा परिषद के अफसरों का कारनामा
253 दिन में महज दो दिन ही लैब मे टेस्ट कराया फिल्टर प्लांट का पानी..
नागदा@टीम भारतीय न्यूज़
आरटीआई ( सूचना का अधिकार ) में उजागर हुई एक हकीकत ने नागदा नपा परिषद के शर्मनाक कारनामें की कलई खोलकर रख दी है। आपसी खींचतान में उलझे पक्ष-विपक्ष के जनप्रतिनिधियों की नासमझी का फायदा उठाते हुए नपा के अफसर शहर की एक लाख की आबादी को 251 (एक जनवरी 2025 से 10 सितंबर 2025 ) दिनों तक बगैर लैब टेस्ट का पानी पिलाते रहे और दावा लगभग 17 हजार जल उपभोक्ताओं के समक्ष शुद्ध पेयजल सप्लाई का करते रहे। जनता की सेहत और सरोकार से जुड़े इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार व आरटीआई एक्टिविस्ट *कैलाश सनोलिया* ने जब सच्चाई टटोली, तो जो सच सामने आया उसने भाजपा बहुमत की परिषद और उसके पूरे कुनबे को शर्मसार कर दिया है। गुरूवार को एक निजी होटल में आयोजित प्रेस काॅन्फ्रेंस में पत्रकार सनोलिया ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उज्जैन व नपा परिषद नागदा से आरटीआई में मिले दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए खुलासा किया कि लगभग एक लाख की आबादी वाले शहर की जनता को बीते 253 दिनों में से 251 दिन बगैर पानी की शुद्धता परखें ही सप्लाई किया गया है। अथार्त जलप्रदाय के पूर्व पानी का लैब में परीक्षण नहीं कराया गया है। महज दो दिन 6 फरवरी और 4 जून को ही पानी की जांच के लिए सैंपल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उज्जैन भेजे गए । इससे यह साबित होता है कि नपा परिषद को जनता की सेहत से कोई सरोकार नहीं है।
पानी के सैंपल की दो जांच रिपोर्ट 11 और 8 दिन बाद आई
हास्यापद है कि नपा ने पानी की जांच के लिए जो दो सैंपल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच के लिए भेजे उनकी जांच रिपोर्ट 11 और 8 दिन बाद नपा को मिली, इस अवधि में बगैर पानी की शुद्धता परखे नपा जनता को पेयजल सप्लाई करती रही। जनता की सेहत के साथ किए जा रहे इस खिलवाड़ के लिए कौन जिम्मेदार है…। इसका जवाब न तो अफसर दे रहे हैं, न जनता के हिमायती कहाने वाले जनप्रतिनिधि ।
#एक अरब का वार्षिक बजट, जांच रिपोर्ट के लिए 4100 रु. तक नहीं
आरटीआई में यह भी सामने आया कि चंबल में बाढ़ के दौरान जब इसी माह लगातार सप्ताह भर तक नलों से मटमैला व बदबूदार पानी सप्लाई करने पर जनता ने सवाल उठाए तो 7 सितंबर को जलकार्य प्रभारी प्रकाश जैन ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर यह स्वीकार किया कि पानी मटमैला जरुर है, लेकिन पूरी तरह शुद्ध है। नपा के नायन ग्राम स्थित फिल्टर प्लांट पर नपा की लैब खराब होने से पानी के सैंपल टेस्टिंग के लिए प्रतिदिन उज्जैन भेजे जाते हैं। जहां मापदंड व मानकों का पालन करने के बाद ही पेयजल सप्लाई किया जाता है। मगर आरटीआई में मिली जानकारी में जैन के झूठ का भांडा फूट गया। हकीकत में सोशल मीडिया पर लाइव आने के तीसरे दिन पानी का सैंपल जांच के लिए उज्जैन भेजा गया। जहां सैंपल की जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 4100 रुपए की डिमांड की। नपा के अफसराें की लापरवाही कहे या मनमानी की आज तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सैंपल जांचने की फीस जो महज 4100 रुपए थी उसका भुगतान नहीं किया गया है। इसलिए नपा के पास इस सैंपल की रिपोर्ट तक नहीं पहुंची है। ऐसे में फिर वही सवाल है कि आखिर किसकी अनुमति से बगैर लैब टेस्ट का पानी जनता को नलों से जलप्रदाय किया जा रहा है।
#नपा के नेता व अफसर पीते हैं आरओ वॉटर
जनता को शुद्धता परखें जलप्रदाय का पाप करने वाले नपा के अफसर और नेता रोज अपने ऑफिस में आरओ वॉटर कैन मंगवाते हैं। सभी इसी कैन का पानी पीते हैं, जो साबित करता है कि 24 करोड़ की जलआवर्धन योजना के तहत निर्मित फिल्टर प्लांट से निकले पानी की शुद्धता व गुणवत्ता पर नपा के जिम्मेदारों को भी संदेह है। संभवत यही कारण था कि जनसुनवाई के दौरान जब नपा सीएमओ प्रेमकुमार सुमन को अभिभाषक संघ अध्यक्ष विजय वर्मा ने नलों से सप्लाई पानी पीने का आग्रह किया तो सीएमओ कन्नी काट गए थे।






























