साइबर ठगो के गिरोह नें पांच हजार रुपए का लालच देकर बैंक में खुलवाते थे खाते फिर उसे 30 हजार रुपए में बड़े गिरोह बेचा किया 8 करोड़ का लेनदेन..
भोपाल@टीम भारतीय न्यूज़
भोपाल पुलिस ने साइबर ठगों को बैंक खाते बेचने वाले गिरोह को पकड़ा है। गिरोह का सरगना तरुण राय लोगों को पांच हजार रुपए में बैंक खाते खुलवाकर उन्हें 30 हजार रुपए में बिहार के ठगों को बेचता था। अब तक 13 खातों में आठ करोड़ रूपए का लेनदेन पाया गया है।
साइबर ठगों को बैंक खाते बेचने वाले एक गिरोह को भोपाल पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है। गिरोह का सरगना पांच-पांच हजार रुपये का लालच देकर लोगों से बैंक खाते खुलवाकर उन्हें खरीदता था। फिर उन खातों को 30-30 हजार रूपए में बिहार के बेतिया में बैठे साइबर ठगों को बेच देता था।
जानकारी के अनुसार 21 वर्षीय तरुण राय हबीबगंज क्षेत्र की श्यामनगर मल्टी में परिवार के साथ रहता है। छह महीने पहले वह टेलीग्राम के जरिए साइबर ठगों के संपर्क में आया था। ठगों ने उससे बैंक खाते खरीदकर उन्हें उपलब्ध कराने के बदले मोटी रकम का प्रस्ताव दिया, जिसके बाद तरुण ने अपने परिचितों से बैंक खाते खुलवाने की पेशकश की और उन्हें पांच हजार रुपये का झांसा भी दिया।
इस तरह कई लोगों ने लगातार उससे संपर्क किया और खाते बेचे। ये खाते बिहार के बेतिया में बेचे गए। पिछले दिनों दिल्ली में हुई साइबर ठगी के रुपयों का लेनदेन इस खातों में हुआ। दिल्ली पुलिस की सूचना पर भोपाल पुलिस ने इन खातों की पड़ताल शुरू की तो तरुण राय और उसके साथी पकड़ में आ गए।
पुलिस नें मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया
- पुलिस ने मुख्य आरोपी तरुण राय उसके साथी अजय राय और करण वाल्मिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस को अब तक 13 बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिसमें करीब आठ करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन मिला है।
पुलिस का कहना है कि यह गिरोह और बड़ा हो सकता है। उसके अन्य सहयोगियों और इनके खरीदे-बेचे गए खातों का ब्यौरा तलाशा जा रहा है। आशंका है कि इस गिरोह में बड़ी संख्या में ऐसे म्यूल खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराए हैं। इसके साथ ही पुलिस बिहार के साइबर ठगों पर शिकंजा कसने के तकनीकी और कानूनी रास्तों की भी तलाश कर रही है।
पासबुक, एटीएम पहुंचाने कई बार बेतिया भी गया
भोपाल में पकड़ा गया तरुण राय बिहार के साइबर ठगों का भरोसेमंद बना हुआ था। वह भोपाल के लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर खाते की पूरी किट, जिसमें एटीएम, पासबुक और चैकबुक होते थे साइबर ठगों तक पहुंचाता था। इसके लिए वह ट्रेन से बिहार के बेतिया का कई बार सफर कर चुका था।






























