उच्च न्यायालय ने धार के इमामबाड़ा मामले से जुड़ी एक याचिका पर आदेश जारी करते हुए वर्तमान की स्थिति को यथावत रखने के निर्देश दिए है।
धार@साबिर खान
न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी ने याचिकाकर्ता इमामबाड़ा ताजिया कमेटी से जुड़े अनवर खान की याचिका पर आगामी सुनवाई तारीख तक के लिए यह आदेश जारी किया है। इसी के साथ इस मामले में शासन पक्ष को नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके पश्चात इस मामले में तारीख दर तारीख सुनवाई के पश्चात कोर्ट अपना न्याय संगत फैसला देगी। इस मामले में ओर जानकारी जुटाने पर कमेटी की और से दावा किया गया है कि करीब 200 सालों से ताजियों का निर्माण किया जा रहा है। उक्त भवन उन्हें स्टेट समय में राजा ने दिया था। इसको लेकर दस्तावेज और जानकारियां भी प्रस्तुत की जाएगी।
इस मामले में प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा इमामबाड़े का भवन विभागीय होने और 1977 से किराया जमा ना करने को लेकर किराए की मांग की थी और भवन खाली करने का नोटिस जारी किया गया था। एक नोटिस इमामबाड़े पर चस्पा भी किया गया था। प्रशासन की इसी नोटिस को आधार बनाकर मुस्लिम पक्ष कोर्ट में पहुंचा था। जहां से उन्हें फौरी तौर पर आगामी पेशी तक के लिए स्टे मिल गया है। फैसले तक स्टे की अवधि बढ़ने की संभावनाएं मुस्लिम पक्ष ने जताई है।
इस मामले में पीडब्ल्यूडी विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। हिन्दू संगठन सांस्कृतिक धरोहर रक्षा समिति ने इमामबाड़े का भवन सरकारी होने और मियादी अवधि के लिए देने के बाद निरंतर कब्जे के रूप में उसका उपयोग का मामला सामने लाया था। जिसके बाद विभाग ने पुराने आदेश को निकालकर उसके आधार पर 46 साल के किराये की मांग की थी। इसके पूर्व विभाग के अधिकारियों को होश भी नहीं था कि भवन सरकारी है। कोर्ट ने स्थगन आदेश प्रदान करने के साथ यह भी लिखा है कि सात कार्य दिवसों के भीतर प्रक्रिया शुल्क के भुगतान पर उत्तरदाताओं को नोटिस जारी किया जाए, ऐसा न करने पर यह याचिका बेंच को आगे संदर्भित किए बिना खारिज कर दी जाएगी। यह भी निर्देशित किया है कि सुनवाई की अगली तारीख तक संबंधित संपत्ति खाली करने के लिए याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाए।






























