स्टॉप डेम के जीर्णोद्धार से पेयजल के लिए आश्वस्त है लाखी के नागरिक, जल संरक्षण की दिशा में मनरेगा की अहम भूमिका
खरगोन@टीम भारतीय न्यूज़
विश्व में सबसे अधिक रोजगार देने वाली महात्मा गॉधी रोजगार गारंटी योजना से दो तरफा लाभ हो रहा है। एक तो जरूरतमंद लोगो को गॉव में ही रोजगार तथा दूसरी ओर मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी हो पा रही है। हम बात कर रहे कुछ ऐसे कार्यो की जो मनरेगा से हुए है और ग्र्रामीण जनता को शत प्रतिशत फायदा हो रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी. दूर स्थित लाखी गांव में सर्दी के दिनों से ही पेयजल की समस्या सामने आने लगती थी। लाखी के लोग सिर्फ इसलिए खुश नही है कि अब गर्मी में पानी की समस्या नही होगी। बल्कि इसलिए भी वे खुश है कि करीब 200 किसानों के कुएं और 50 ट्यूबवेल स्टॉप डेम से रिचार्ज होने लगे है। जिस गांव के लोग गर्मी का नाम सुनते ही पानी के संकट से घबराने लगते थे। उस गांव के लोग आज पेयजल को लेकर आश्वस्त हो गए है। इनके आश्वस्त होने का एक छोटा सा कारण है स्टॉप डेम। स्टॉप डेम तो उनके गांव में 15 वर्षाे से है लेकिन अनुपयोगी मानकर स्टॉप डेम से हजारों बार गुजरे। आखिरकार विश्व मे सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली योजना से उस चेक डेम का जीर्णोद्धार हो गया।
2 घंटे सिंचाई करने वाले कुएं अब 4 घंटे तक दे रहे साथ
लाखी के ओमप्रकाश शर्मा का कहना है कि पुराने टूटेफूटे स्टॉप डेम पर आंशिक काम करने के बाद हमारे खेतो में गेहूं, चना, मिर्च, प्याज और सब्जियों की फसलें लहलहाने लगी है। धर्मेंद्र कुशवाह का कहना है कि जब ये डेम का काम नही हुआ तो मुश्किल से उनके कुएं पर लगी 3 हॉर्स पॉवर की मोटर 2 घण्टे चल पाती थी लेकिन अब 4 घंटे भी आराम से सिंचाई करने लगे है। नाले के सहारे इंदिरा सागर का पानी नहर में छोड़ा जाता था। जो नाले से सीधे बह जाता था, सिर्फ मोटर पंप चलाकर ही सिंचाई कर पाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। गॉव के रोजगार सहायक दीपक ने बताया कि गॉव में 15 वर्ष से बना एक स्टॉप डेम है जो पूरी तरह अनुपयोगी था। इस स्टॉप डेम पर मात्र 48 हजार रूपये से शटर और कुंडिया लगाई गई और नाले की साफ-सफाई कर गहरीकरण किया गया। आज यह स्टॉप डेम गॉव की उन्नती मार्ग बन गया है। मनरेगा के परियोजना अधिकारी श्याम रघुवंशी ने बताया कि मनरेगा के तहत् जिलें में 1112 तालाबों, स्टॉप डेम और चेक डेम का जीर्णोद्धार कर जल संरक्षण के कार्य प्रारंभ किये गये है।
नदी के जल को शुद्व रखने में उपयोगी है डब्ल्यूएसपी
हर गाँव या छोटे-छोटे कस्बों में कई नालियॉ होती है जिसके सहारे गाँव या नगर की गंदगी और गंदा जल बहकर जाता है। जो किसी एक स्थान पर जाकर एक मुख्य नाली में बदल जाती है। ऐसे स्थान पर मनरेगा के तहत् जल स्थरीकरण के प्लांट विकसित किये जा रहे है। इन प्लांटस में सारा गंदा पानी और गंदगी एकत्रित होती है। क्योंकि जल एक स्थान पर एकत्रित होता है इसलिए जल के साथ बहकर आई गंदगी जमीन की सतह में बैठ जाती है। इसमें तीन टैंक होते है। एक टैंक में पानी भरने के बाद दूसरे और फिर तीसरे टैंक में पानी अपनी गंदगी छोड़ कर या यू कहें कि शुद्व होकर आगे निकल जाता है। इसका लाभ यह है कि नदी में मिलने वाला जल शुद्व होता है। जिले में ऐसे 106 डब्ल्यूएसपी स्वीकृत हुए है। जिसमें 2 पूर्ण हुए है। जबकि 71 प्रगतिरत है।
मलेरिया डेंगू जैसी बिमारियों से बचाने में सोख पीठ का योगदान
मनरेगा और स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिलें में 2346 सामुदायिक सोख पीट, हैंडपंप सोख पीट और लीच पीट बनाने का लक्ष्य है। जिसमें से अब तक 647 बनकर तैयार हो गए है। ये स्ट्रक्चर ऐसे स्थानों पर बनाए गए है जहाँ हमेशा गंदा पानी एकत्रित रहता है। जैसे हैंड पंप के आसपास या कुडाकरकट वाला क्षेत्र होता है। ये स्ट्रक्चर ऐसे स्त्रोत से जोड़ दिए जाते है। जिससे गंदगी भी दूरी होती है और जल भी जमीन में जाता है। खासकर गॉवों में एक स्थान पर गंदे जल में कई प्रकार के मच्छर और कीड़े पनपते है। ऐसे स्ट्रक्चर से मलेरियॉ और डेंगू जैसी बिमारियों से भी मुक्ति मिलती है। जिला पंचायत सीईओ श्री दिव्यांक सिंह ने बताया गया कि 2 फरवरी 2005 को मनरेगा अधिनियम लागू हुआ था। आज इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में न सिर्फ रोजगार उपलब्ध हो रहे है बल्कि कई आधारभूत संरचनाएँ बनकर तैयार हुई है। इसमें जल संरक्षण और स्वच्छता में बड़े अच्छे परिणाम देखने में आ रहे हैं।






























