गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों का जीवन खतरे में था। महिला की बच्चेदानी में बच्चे के साथ विकसित हुई 12 किलो की विशालकाय गठानें मानो ‘अशुभ’ नियति लिखने पर आमादा थी लेकिन जे.के. अस्पताल के डॉक्टर्स की टीम के परिश्रम और इस टीम की अगुवाई करने वाली डॉ जया मिश्रा के संकल्प के आगे अंततः अशुभ हार गया और जीवन की जीत हुई। पहले बच्चे का सुरक्षित प्रसव हुआ और आज महिला की बच्चेदानी सहित सारी गठानें ऑपरेशन के जरिये निकाल ली गई। अब माँ/बेटा दोनों स्वस्थ हैं।
उज्जैन@टीम भारतीय न्यूज़
चिकित्सा जगत्त की यह अविश्वसनीय-सी किन्तु सच्ची कहानी राजगढ़ जिले के ग्राम कालूखेड़ी की 30 साल की सीमा पति हेमन्त यादव की है। विवाह के बाद वह पहली बार गर्भवती हुई मगर इसी साल जून माह में परीक्षण के दौरान पता चला कि उसके गर्भाशय में गठानें हैं, जो बच्चे और उसके लिए जानलेवा हो सकती है। दो-तीन अलग-अलग अस्पतालों से महिला को जीवनरक्षा के लिए समान सलाह दी गई कि ‘बेहतर है आप गर्भपात करा लो!
इस बीच जून माह में सीमा जे.के.अस्पताल में डॉ जया मिश्रा से मिली। परीक्षण के बाद डॉ मिश्रा ने गर्भपात के बजाय बच्चे को सुरक्षित प्रसव कराने की चुनौती ली। नौ माह के पूर्ण गर्भकाल के बाद दो दिन पहले सीमा प्रसव के लिए अस्पताल लाई गई। तब रात्रि में सर्जरी से उसका प्रसव कराया गया जिसमें उसने बेटे को जन्म दिया। उस रात महिला का ब्लडप्रेशर चिंताजनक स्तर पर 200 पार था और गर्भाशय और बच्चे के आकार से बड़ी गठानें थी। मूलतः छोटे आकार की गठानें गर्भावस्था में फूलकर विशालकाय हो गई थी लेकिन डॉक्टर्स ने अपने संकल्प से इस चुनौती पर विजय पा ली। कुछ देर बाद महिला का आँचल ‘नवजीवन की किलकारी’ से जगमगा गया था।

डॉक्टर्स के संघर्ष का दूसरा अध्याय बुधवार को पूर्णाहुति को प्राप्त हुआ। आम तौर पर ऐसे मामलों में प्रसव के बाद गठान पीड़ित महिला का ऑपरेशन डेढ़ माह किया जाता है किन्तु सीमा की पीड़ा असहनीय थी, अतः दो दिन बाद ही ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। बुधवार को करीब 4 घण्टे चले ऑपरेशन के बाद डॉक्टर्स ने सीमा की बच्चेदानी से कुल 12 किलो की तीन गठानें निकाल दी, जो उसके सवा दो किलो के नवजात के कुल वज़न के मुकाबले करीब छह गुना बड़ी थी। गठानों का आकार देख डॉक्टरों की टीम दंग रह गई। डॉ जया मिश्रा बताती है कि उनके 25 साल से अधिक लम्बे केरियर में किए गए असंख्य ऑपरेशन में यह सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण था, जिसमें इतनी वज़नदार गठानें निकली।
इस जीवनरक्षक ‘अनुष्ठान’ में डॉ साधना दुबे, डॉ अदिति, डॉ मोहित जैन, डॉ मनीषा अग्रवाल, डॉ दीपिका अग्रवाल और डॉ तपन शर्मा सहित सहयोगियों ने अपने संकल्प की आहुति दी।






























