आदिवासी समाज/जयस एवं ग्रामीण जनों द्वारा तिरला विकासखंड में स्थित खेड़ी डैम में जल संसाधन विभाग एवं निर्माण एजेंसी द्वारा विगत 2016-17 से डैम का निर्माण मध्यप्रदेश शासन विभाग के द्वारा निर्माणधीन है।
धार@टीम भारतीय न्यूज़
जिसकी लागत लगभग 30 करोड़ रुपए है। लगभग 150 हेक्टेयर में डैम का निर्माण किया गया इसमें 20 हेक्टेयर शासकीय जमीन है एवं 130 हैक्टर किसानों की जमीन। लगभग 200 से अधिक किसानों की जमीन डूब में गई है। वहीं उनको मुआवजा दिया गया है,किंतु कुछ किसानों को आज भी 4-5 साल गुजर जाने के बावजूद भी मुआवजा नहीं दिया गया। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता विजय चोपड़ा द्वारा बताया गया कि जल संसाधन विभाग की और निर्माण एजेंसी की डेम निर्माण मिली भगत पूरी लीपा से डैम में बड़ी बड़ी दरारें आ रही है कहीं ना कहीं करोड़ों के कार्य को सिर्फ कागजों पर ही निर्माण कर लीपा पोती कर दी गई है वहीं चोपड़ा द्वारा बताया गया जबकि एक गरीब आदिवासी किसान अपने जीवन यापन की प्रक्रिया एक पैतृक भूमि और मजदूरी पर निर्भर रहता है। वहीं अपनी जीवन यापन प्रक्रिया पालने के लिए आदिवासी अंचल गावों में मक्का पका कर अपना पेट साल भर पाल लेता है।उसका भी खेत में पानी भरने के कारण सभी नुकसान हो जाता है। किंतु जल संसाधन विभाग के द्वारा किसानों को आज भी उनका मुआवजा और उनकी उचित लागत नहीं दी गई है। किसान अपनी आपबीती अधिकारियों को सुनाने जाते हैं।ना अधिकारी सुनते हैं ना जनप्रतिनिधि जबकि उन्हीं किसानों के नाम कलेक्टर द्वारा आवंटित अवार्ड में शामिल भी है फिर भी उन्हें मुआवजा आज तक नहीं दिया। किसान विगत चार-पांच सालों से अपनी फसल नहीं कर पा रहे हैं जिसको लेकर अनेकों बार जल संसाधन विभाग के चक्कर लगा दिए गए फिर भी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। ना फसल नुकसान की भरपाई कर पा रहे हैं, दूसरी ओर जल संसाधन विभाग व निर्माण एजेंसी की मिलीभगत से निर्माण डैम में आ रही बड़ी-बड़ी दरारें जिसकी पूर्व में भी तत्कालीन कलेक्टर महोदय श्रीमन शुक्ला, दीपक सिंह जी, श्रीकांत बनोठ जी, अलोक सिह जी एवं वर्तमान कलेक्टर महोदय को दूरसंचार द्वारा जानकारी अवगत करवाई गई है। वहीं उच्चाधिकारियों द्वारा जब-जब विभागों को निर्देशित किया जाता है तब तब विभाग द्वारा निर्माण एजेंसी द्वारा आई दरारों पर मुरम डालकर कमी को छुपा दिया जाता है। जबकि निरंतर डैम निर्माण के पश्चात आज दिनांक तक डैम में बड़ी-बड़ी दरारें होती जा रही है जो बारिश के समय हमेशा अपना आकार बड़ा कर लेती है जिससे डैम के फूटने की संभावना हमेशा बनी रहती है और इसका भय दहशत डैम के नीचे स्थित ग्रामीणों में हमेशा बना रहता है। कहीं ना कहीं विभाग और निर्माण एजेंसी द्वारा करोड़ों के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार और लीपा पोती की जा रही हैं। वहीं जल संसाधन विभाग को अनेकों बार अवगत कराने के बावजूद भी जल संसाधन विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है डैम से लगे अनेको ग्रामीण जैसे कुंवा,जामला, जामन पाटी, करौंदिया,बंदाव, निमपुरा, उकाला सरपंच पूरा,नयापुरा आदि गांव के छात्र छात्रा उकाला स्थित माध्यमिक एवं हाई स्कूल में अध्ययन हेतु जान जोखिम में रखकर डैम के अंदर पानी में डूबी पुलिया से आवागमन करते हैं जिसमें ना रेलिंग है,ना कोई सहारे की लिए बाउंड्री जिससे कभी भी बड़ी जनहानि होने की संभावना एवं भय बना रहता है। अनेकों ग्रामीणों को आवागमन में पुलिया डूबने के कारण भारी मशक्कत करना पड़ती है, और आवागमन पूर्णता बंद है विभाग के द्वारा पुलिया निर्माण की बात कही गई थी। लेकिन आज दिनांक तक वहां पुलिया निर्माण नहीं किया गया है जिससे ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी परेशानी एवं दिक्कत का सामना करना पड़ता है वही जल संसाधन विभाग और निर्माण एजेंसी द्वारा डैम में भारी भ्रष्टाचार लीपापोती की गई है। जिसकी उचित जांच कर शेष रहे किसानों को मुआवजा एवं डैम के अंतर्गत डूबी पुलिया निर्माण हेतु ग्रामीण जन समाज जनों द्वारा ज्ञापन के माध्यम से अवगत करवाया गया। वहीं कलेक्टर महोदय धार द्वारा बताया गया आपके द्वारा हमको वॉट्सएप जानकारी भेजी गई थी उसके अनुरूप हमने जांच करवाई प्रारम्भ करवा दी है, उसकी उचित जांच के आदेश भी हमने दे दिये है। किसी प्रकार की समस्या नहीं आयेगी। और किसी प्रकार की कोई स्थिति हो तो आप तुरंत आप हमें अवगत जरूर करवा दीजिए।पुलिया निर्माण और शेष मुआवजा को लेकर शीघ्र हम बात करते है। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता विजय चोपड़ा, भारत सीह गामड,अंकिता अमलियार, सुबित्रा मकवाना,राज परमार,दिलीप निनामा,सिद्धार्थ भूरिया,भेरू वसुनिया,गोकुल गिरवाल,सुनील डाबी,राजेश चौहान,राहुल वसुनिया,मनोहर निनामा,श्याम वास्केल,सुरेश खराड़ी,दुर्गेश डोडियार,चुन्नीलाल मोरे,संजय मंडलोई इत्यादि समाज जन उपस्थित थे।






























