फीवर क्लीनिक और कोविड वार्ड एक डॉक्टर के भरोसे, सरकारी आवास के अभाव में अप डाउन करने को मजबूर चिकित्सक।
धरमपुरी@सय्यद जफर अली
प्रशासन ने बढ़ते कोविड संक्रमण को रोकने के लिए व्यवस्थाएं तो जुटा ली है , लेकिन नगर परिषद ,महिला बाल विकास ,पुलिस विभाग और स्वास्थ्य विभाग के आपसी तालमेल ना होने से व्यवस्थाएं नाकाम साबित हो रही है। जबकि कोविड संक्रमण रोकने के लिए इन विभागों की अहम भूमिका है, जिसका निर्वाह ठीक से नहीं होने का अंदाजा संक्रमितो केे निजी अस्पतालों के बाहर भीड़ देखकर लगाया जा सकता है। जो चिंताजनक भी है।
तहसील मुख्यालय और क्षेत्र में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने अकेले के दम पर व्यवस्थाएं जुटा ली। एसडीएम राहुल चौहान ने पदस्थ होते ही ताबड़तोड़ अपने राजस्व क्षेत्र में कोविड वार्ड, कोविड केयर सेंटर ,ऑक्सीजन की उपलब्धता करवा दी। बावजूद इसके नगर में बनाया गया कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास में 50 बेड कोविड केयर सेंटर शुरू हुुए 6 दिन हो चुके है, स्टॉफ होने के बाद भी यहा एक भी मरीज भर्ती नही है। बैठक के दौरान एसडीएम चौहान ने स्वास्थ्य और महिला बाल विकास को घर घर जाकर सर्वे के लिए निर्देश दिए थे। किंतु नगर में अब तक सर्वे का काम शुरू नहीं हुआ है।परियोजना अधिकारी प्रिया बुंदेला ने बताया कि धरमपुरी को छोड़ सभी जगहों पर सर्वे का कार्य चल रहा है।
कोविड वार्ड के हालात
सरकारी अस्पताल के दो वार्डो में 20 बेड कोविड वार्ड में तब्दील कर दिया गया। जिसमें 23 अप्रेल तक 73 मरीज भर्ती हुए। इन के उपचार के लिए मात्र एक चिकित्सक डॉक्टर प्रीतेश जायसवाल ही फीवर क्लीनिक, कोविड वार्ड और कोविड सेम्पलिंग का कार्य अकेले देख रहे है। कोविड वार्ड की क्षमता 20 बेड है, जिसके लिए 2 डॉक्टर, 4 नर्स और 4 स्वीपर जरूरी है। पूर्व बीएमओ डॉ बी.आर कौशल को डुयूटी आदेश दिया गया। लेकिन वे डुयूटी पर नही पहुचे। पिछले वर्ष धार में डॉ प्रीतेश जायसवाल ने कोविड वार्ड बखूबी सम्भाला था। जो कोविड के मामले में काफी अनुभवी है। उन्हें यदि ब्लॉक में कोविड का नोडल बना दिया जाय तो उनके अनुभव का लाभ लिया जा सकता है। हालात ये की डॉ जायसवाल को कोविड वार्ड के पास बना क्वार्टर ही मिल पाया। जिसके कारण वे 10 किलोमीटर दूर अपने घर से अपडाउन कर रहे है।
सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम फेल
सरकारी अस्पताल में बने कोविड वार्ड में सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम फेल होने के कारण भर्ती 13 मरिजो को पृथक-पृथक ऑक्सीजन बॉटल से व्यवस्था करनी पड़ी। डुयूटीरत डाक्टर ने बताया कि सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम लीकेज होने से 24 घण्टे में 17 ऑक्सीजन सिलेंडर लगे थे। जिसके बाद इसे बंद करना पड़ा था। हालाकिं 4 ऑक्सीजन कंस्ट्रेशन सिस्टम भी एसडीएम ने उपलब्ध करवा दिए है। यदि इसके साथ कोविड वार्डो में क्षमता के अनुरूप एनआरबीएम मास्क उपलब्ध करवा दिए जाते है तो ऑक्सीजन के मामलों में बचत हो सकती है।
कोविड वार्ड का 13 का हिसाब

23 अप्रेल तक 13 दिनों में 73 मरीज भर्ती हुए। जिनमे से 11 मृत्यु हुई।,19 धार, इंदौर रेफर हुए।, 16 स्वस्थ होकर घर लौटे। 4 मरीज ठीक होने पर होम आइसोलेट हुए। 13 मरीज कोविड वार्ड में भर्ती है जिनमें 11 सन्दिग्ध और 2 पॉजिटिव है। कोविड वार्ड के बाहर पानी पीने की व्यवस्था नही है। अभाव में मरिज के साथ आए अटेंडर प्यास के मारे बेहाल है।
पुलिसिंग की कमी
नगर में कोरोना कर्फ़्यू कही दिखाई नही देता। पुलिस केवल मास्क और मोटर विकल एक्ट के चालान बनाकर अपना पल्ला झाड़ रही है। अधिकतर व्यापारी ग्राहकों को दुकान में अंदर लेकर शटर लगाकर व्यापार कर रहे है। कुछ व्यापारी घरो के पिछले दरवाजे से ग्राहकों को दुकानों में भीड़ लगा रहे है। जबकि व्यापारी संघ खुद ऐसे व्यापारियों पर कार्यवाही करने की बात कहते है, लेकिन स्थानीय पुलिस इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। जिससे संक्रमण तेजी से फैलने का अंदेशा बना हुआ है।
घरो में करवा रहे इलाज
नगर में सर्वे नही होने के कारण बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित चेस्ट सीटी स्केन करवाकर घरो में इलाज ले रहे है। जो प्रशासन के आकड़ो की गिनती में नही आ रहे है। जिसके कारण भी संक्रमण तेजी से फैल रहा है।






























