धरमपुरी नगर सहित आस – पास ग्रामीण अंचलों में रविवार महिलाओं में कापी उत्साह का माहोल देखा गया । नगर की नर्मदा की छोटी धारा स्थित तट पर शीतला माता मंदिर में यहां रविवार अल सुबह से मंदिर में नगर की महिलाओं का ताता लगा ।
धरमपुरी@सय्यद जफर अली
महिलाऐं ठंडे पानी से स्नान कर के नव श्रृगांर व वस्त्र धारण कर के अल सुबह से शीतला मंदिर में महिलाऐं एक दिन पूर्व बना भोजन और पूजा की आरती की थाली लेकर शीतला माता मंदिर में जाकर माता की पूजा अर्चना कर ठंडा भोजन का भोग लगाकर परिवार की सुख समृद्वी की कामना की । मंदिर में हजारों की संख्या में श्रृद्वालु महिलाऐं एकत्रित हुई और माता की पूजा की । नगर में परम्परा गत चली आ रही शीतला सप्तमी पर्व महिलाओं ने हर्षो उल्लास के साथ मनाया । शीतला सप्तमी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता की पूजा करने एवं वृत रखने से ( चिकन पॉक्स ) माता का प्रकोप खसरा , फोडे – फुंसी , नेत्र रोग आदी परिवार में नही होते । माता इन प्रकोप रोगों से रक्षा करती है। माना जाता है की मां भगवती का ही एक रूप माना जाता । सप्तमी के दिन महिलाएं सुबह से ठंडे जल से स्नान करकें शीतला माता मंदिर में जा कर माता की पूजा अर्चना करती है और एक दिन पूर्व बना बासी ( ठंड़ा ) भोजन प्रसादी का भोग माताजी को चड़ाते है। बासी ( ठंड़ा ) भोजन खाने के पीछे भी एक धार्मिक मान्यता है माना जाता की शीतल , ठंड़ा भोजन और जल पसंद है। इसलिए माताजी को शीतल , ठंड़ा भोजन का ही भोग लगाया जाता । परिवार के सभी सदस्य इस दिन बासी ( ठंड़ा ) भोजन खाते है। इससे माताजी प्रसन्न होते है। यह ऋतुुुु का अंतिम दिन होता है। ऋतु परिवर्तन से मानव शरीर में विभिन्न प्रकार के विकार एवं रोग होने स्वाभाविक है। इन विकारों को दूर करने और इनसे रक्षा करने के लिए माता शीतला का वृत व पूजा अर्चना की जाती और शीतला माता इन विकारों से रक्षा करती है।






























