सतीपुरा-गढ़ के बीच मान नदी पर 6 करोड़ का पुल तैयार, 15 हजार से ज्यादा आदिवासियों को मिली बड़ी राहत…
धार@अमीन खान
धार जिले के तिरला विकासखंड में सतीपुरा से गढ़ के बीच मान नदी पर बना करीब 200 मीटर लंबा पुल क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए आवागमन की बड़ी सुविधा बनकर सामने आया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इस पुल से क्षेत्र की 15 हजार से अधिक आदिवासी आबादी को सीधे तौर पर लाभ मिलने की बात सामने आई है।
नदी पार करने के लिए नाव और डोंगी पर निर्भर थे ग्रामीण..
पुल निर्माण से पहले सतीपुरा और गढ़ सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए मान नदी पार करना बड़ी चुनौती था। ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए कई बार डोंगी और नाव का सहारा लेना पड़ता था, जिससे विशेषकर बारिश के मौसम में जोखिम बना रहता था।
वहीं, नदी पार करने का सीधा रास्ता उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीणों को दूसरे मार्ग से लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इसके चलते उन्हें करीब 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ता था। इससे समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ जाते थे।
15-20 किलोमीटर का सफर घटकर 2-3 किलोमीटर…
अब सतीपुरा-गढ़ के बीच मान नदी पर पुल बनने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। पहले जहां दूसरे रास्ते से जाने पर करीब 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं पुल बनने के बाद यह दूरी घटकर लगभग 2 से 3 किलोमीटर रह गई है।
इससे ग्रामीणों के दैनिक आवागमन में समय की बचत होने के साथ-साथ क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी मजबूत हुई है।
स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंच आसान..
पुल बनने का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा है। अब क्षेत्र के लोगों के लिए स्कूल, अस्पताल, बाजार और रोजगार के अवसरों तक पहुंच पहले की तुलना में आसान हो गई है।
छात्रों को शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी, वहीं मरीजों और उनके परिजनों के लिए अस्पताल तक पहुंचने में भी कम समय लगेगा। किसानों और ग्रामीणों को बाजार तक पहुंचने तथा अपनी उपज और अन्य जरूरतों के लिए आवागमन में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
बारिश में नदी पार करने का जोखिम हुआ कम..
मानसून के दौरान नदी में पानी बढ़ने पर ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या नदी पार करने की होती थी। ऐसे समय में नाव या डोंगी के जरिए आवागमन जोखिम भरा हो सकता था। पुल बनने के बाद इस जोखिम में कमी आई है और ग्रामीणों को सालभर सुरक्षित आवागमन का रास्ता मिला है।
स्थानीय लोगों के लिए यह पुल केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सुविधा, सुरक्षा और विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
आदिवासी अंचल में कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती…
तिरला विकासखंड का यह क्षेत्र बड़ी संख्या में आदिवासी आबादी वाला इलाका है। ऐसे उमें सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार ग्रामीणों को मुख्यधारा की सुविधाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
करीब 6 करोड़ रुपए की लागत और 200 मीटर लंबाई वाला यह पुल सतीपुरा और गढ़ सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आवागमन का नया विकल्प बना है। इससे क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर सतीपुरा-गढ़ के बीच मान नदी पर बना यह पुल ग्रामीणों के लिए लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। अब 15 हजार से अधिक आदिवासी आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के साथ क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।






























