मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरु पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में जिन सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण अभी शेष है, उन्हें गुरु पूर्णिमा से पहले पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति और शिक्षा के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है।
भोपाल@साबिर खान fm
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में इस वर्ष ‘महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व’ के रूप में गुरु पूर्णिमा का आयोजन किया जाएगा। इसमें स्कूल शिक्षा, जनजातीय कार्य, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा विभाग के साथ-साथ निजी शिक्षण संस्थानों, खेल, संगीत, चित्रकला, नाटक और अन्य कला संस्थानों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
महर्षि सांदीपनि पर प्रकाशित होगी विशेष पुस्तिका…
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महर्षि सांदीपनि के जीवन, गुरुकुल शिक्षा पद्धति और भारतीय शिक्षा व्यवस्था में उनके योगदान पर आधारित 10 से 20 पृष्ठों की एक लघु पुस्तिका तैयार कर सभी विद्यालयों में वितरित की जाए, ताकि विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित हो सकें।
गुरु पूजन कार्यक्रम होंगे आयोजित…
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी शासकीय और निजी विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में गुरु पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इन आयोजनों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालयों में मनाए जाने वाले मित्रता दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंग भी बताए जाएं।
गुरु पूर्णिमा बने जनभागीदारी का उत्सव…
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरु पूर्णिमा को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी का उत्सव बनाया जाए। इससे विद्यार्थियों और युवाओं में गुरुजनों के प्रति सम्मान तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आस्था और मजबूत होगी।
उन्होंने सभी सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों को इस अभियान से जोड़ते हुए इसे सांस्कृतिक और शैक्षणिक जन-आंदोलन का स्वरूप देने पर जोर दिया।
29 जुलाई को होंगे विविध कार्यक्रम…
बैठक में अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रदेशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में मां सरस्वती पूजन, गुरु सम्मान, व्याख्यान, छात्र-शिक्षक संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक प्रतियोगिताएं और अन्य रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरु-शिष्य संस्कृति का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि नई पीढ़ी अपने सांस्कृतिक और शैक्षणिक मूल्यों से जुड़ सके।






























