धार जिले से एक हृदयविदारक और सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली खबर सामने आई है। पंचायत और जनजातीय क्षेत्रों में पेसा कानून के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभा रही रजनी बामनिया पेसा मोबिलाइज़र की बाइक हादसे में मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब वे जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री के नाम मांग पत्र सौंपने के बाद अपने घर लौट रही थीं।
धार@साबिर खान fm
जानकारी के अनुसार, मृतक रजनी पेसा कार्यकर्ता विगत कई वर्षों से पंचायत विभाग के अधीन कार्यरत थीं। वे जनजातीय क्षेत्रों में पेसा अधिनियम को जमीनी स्तर पर सशक्त करने में जुटी थीं। मगर, उन्हें मात्र ₹4000 प्रति माह मानदेय मिलता था — वो भी पिछले 4-5 महीनों से नहीं मिला था। आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के बीच, उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा था, जिसमें मानदेय बढ़ाने, समय पर भुगतान और पेसा कर्मियों को स्थायी दर्जा देने की मांगें रखी गई थीं।
लेकिन दुर्भाग्य देखिए — रजनी की वापसी यात्रा ही उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई। रास्ते में उनकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
शासन की संवेदनहीनता पर फूटा आक्रोश..
इस घटना ने पूरे प्रदेश के पेसा मोबिलाइज़र्स को झकझोर दिया है। रजनी बामनिया की पहचान एक जिम्मेदार और समर्पित पेसा कार्यकर्ता के रूप में की गई, जिन्होंने वर्षों से सीमित संसाधनों के बीच जनहित के कार्य किए।
पेसा कर्मचारी संघ और साथी कार्यकर्ताओं ने इस हादसे को सरकार की लापरवाही और अनदेखी का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि पंचायत विभाग इन कार्यकर्ताओं से सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्य करवाता है, लेकिन उन्हें न तो स्थायित्व मिला, न सम्मान।
पूरे प्रदेश से उठी न्याय की मांग..
मध्यप्रदेश के 20 से अधिक जिलों में कार्यरत पेसा मोबिलाइज़र्स ने शासन से मांग की है कि—
मृतक के परिवार को तत्काल आर्थिक मुआवजा दिया जाए
आश्रितों को सरकारी नौकरी मिले
पेसा कर्मियों की सभी लंबित मांगों पर त्वरित निर्णय लिया जाए
मानदेय को समुचित और समयबद्ध रूप से जारी किया जाए
इस घटना ने यह गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है कि जो लोग गांवों के विकास की योजनाओं को ज़मीन पर उतार रहे हैं, उनकी ज़िंदगी इतनी असुरक्षित और उपेक्षित क्यों है?
क्या यह शहादत लाएगी कोई बदलाव?
पंचायत पैसा मोबिलाइज़र कर्मचारी संघ मंडला सहित पूरे प्रदेश से पेसा कार्यकर्ताओं ने मृतका को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सरकार से तत्काल संवेदनशील कदम उठाने की मांग की है। इस त्रासदी के बाद सरकार पर अब यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह सिर्फ श्रद्धांजलि तक सीमित न रहकर व्यवस्था सुधार के लिए ठोस कदम उठाए।






























