28वीं सिंधु दर्शन यात्रा के तहत सिंधु भवन ट्रस्ट लेह व सिंधु दर्शन यात्रा समिति की अखिल भारतीय बैठक विगत दिनों 16 जनवरी को अग्रसेन वाटिका ,अग्रसेन पार्क, कश्मीरी गेट ,मेट्रो स्टेशन, नई दिल्ली में आयोजित बैठक मे असम ,नागालैंड, मेघालय, सिक्किम ,त्रिपुरा ,केरल ,बंगाल, तमिलनाडु, चेन्नई ,उड़ीसा, गुजरात ,महाराष्ट्र ,पंजाब हरियाणा ,उत्तर प्रदेश ,झारखंड मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ तथा जम्मू व हिमाचल प्रदेश के लगभग 100 से अधिक पदाधिकारी के समक्ष मध्य प्रदेश धार के सेवानिवृत शिक्षक व खोजीं पत्रकार, विजय शिंदे द्वारा लिखित, संस्मरण यात्रा वृतांत “मेरी सिंधु एवं तवांग तीर्थ दर्शन यात्रा “पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय समिति के वरिष्ठ सदस्य माननीय डॉक्टर इंद्रेश कुमार जी तथा अध्यक्षता कर रहे श्री मुरलीधर मखीजा जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष सिंधु दर्शन यात्रा समिति व श्री भूपेंद्र कंसल जी महामंत्री सिंधु दर्शन यात्रा समिति की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
धार@साबिर खान
भारत से आए सभी प्रांत के आए लगभग 100 से अधिक पदाधिकारी द्वारा पुस्तक के विमोचन पर सभी ने बधाई देते हुए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाईयां दी गई।
इस पुस्तक के प्रकाशन में माननीय इंद्रेश जी ने शुभकामना संदेश में 27 वीं सिंधु दर्शन यात्रा तथा तवांग तीर्थ दर्शन यात्रा पर जिसमें तीर्थ सुशासन, विकास व संस्कार संस्कृति के पावन संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का एक अच्छा साधन है । सिंधु दर्शन यात्रा ने लद्दाख के विकास तथा भारत की एकता व अखंडता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, साथ ही श्री मुरली धर माखीजा ,अध्यक्ष सिंधु दर्शन यात्रा समिति ,नई दिल्ली द्वारा भी शुभकामना संदेश में लिखा है कि इस पुस्तक में भौतिक पक्ष ही नहीं सौंदर्य पक्ष का भी चित्रण किया गया है। निश्चय ही इसके पठन के बाद जन सामान्य, सिंधु दर्शन यात्रा के लिए तत्पर तैयार हो जाएंगे । सिंधु दर्शन एवं तवांग दर्शन के इच्छुक व्यक्तियों के लिए यात्रा का महत्व एवं यात्रा के आनंदमई पक्ष की जानकारी उनकी यात्रा के लिए मिल का पत्थर साबित होगी । इस पुस्तक के प्रकाशन पर मध्य प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी ने भी शुभकामनाएं संदेश में लिखा है कि भारतीय संस्कृति में हमारी नदियों के प्रति आस्था की अभिव्यक्ति देखने को मिलती है सिंधु नदी के धार्मिक एवं सामाजिक सांस्कृतिक महत्व के साथ ही यात्रा संस्मरण के माध्यम से युवा पीढ़ी को जानकारी देने का कार्य सराहनीय है। मैंने स्वयं सिंधु दर्शन यात्रा में हिस्सा लिया है । इस यात्रा में भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना सद्भावना और सांस्कृतिक विविधता के दर्शन होते हैं ।
लेखक विजय शिंदे ने जानकारी देते हुए बताया कि मैं अपनी यात्रा के अनुभव को प्रतिदिन अपने समाचार पत्र दैनिक मराठा संदेश में आलेख के रूप में यात्रा के दौरान प्रतिदिन नियमित रूप से लिखता था ।
इसी लेख को देख सिंधु दर्शन यात्रा समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य व पूर्व महापौर ,नगर निगम उज्जैन के आदरणीय श्री प्रकाश चित्तौड़ा जी द्वारा मुझे इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा देकर मुझे सहयोग को मार्गदर्शन व साथ-साथ प्रेरणा के साथ उनका ही आशीर्वाद है कि मैं इस पुस्तक को लिखने में सफल हो सका । विमोचन के अवसर पर मध्य प्रदेश उज्जैन के श्री पुनीत सांखला जी जो राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य व मालवा प्रांत के यात्रा यात्रा प्रभारी भी मेरे साथ उपस्थित थे। श्री पुनीत सांखला जी द्वारा भी मुझे इस पुस्तक के लेखन में सहयोग राशि के लिए विज्ञापन आदि दिलवाने में सहयोग प्रदान किया गया।






























