निमाड़ में चैत्र माह की तिथि ग्यारस पर ग्राम की बाड़ियों में माता जी की मुठ ज्वारे धराते ही 10 दिवसीय गणगौर पर्व की सुरुआत हो जाती है।
बिस्टान@टीम भारतीय न्यूज़
आसपास के गावो में माता के झलारिया गीतों की गूंज सुनाई दे रही है।घरों में पर्व को लेकर साफ सफाई का दौर सुरु हो गया मनोरथी अपने रिश्तेदारों को आमंत्रण भेज रहे है माता का आगाज होतें ही बाजारों में दुकाने माल से सरोबार हो गई ख़रीददारो की आवाजाही सुरु हो गई अंचल में पर्व को लेकर उत्साह बना हुआ है इसी कड़ी में चैत्र नवरात्रि की सुरुआत होते ही बाग बगीचों में इन दिनों माँ गणगौर की स्तुति करने बालिका महिलाए वन विहार कर रही है बाग बगीचों में पहुँचकर झालरियो पर नृत्य करती है।फूल पाती लाकर माता जी का श्रीगार करती है इस तरह माता की आराधना भक्ति कर गणगौर माँ को प्रसन्न किया जाता है बिस्टान महिला मित्र मंडल की कल्पना दीक्षित,संगीता राजेश मंडलोई, एव अन्य सखियों ने खेल पाती खेली गई शंकर पार्वती के रूप में दूल्हे ओर दुल्हन का स्वांग रच कर पर्व की परम्पराओ का निर्वाह किया गया पंडित बसंत दुबे के अनुसार पर्व की सुरुआत चैत्र माह की ग्यारस तिथि से तीज तक माता रूपी ज्वारों को सींचा जाता है तीज के दिन ही दर्शनाथ के लिए बाड़ी के पट खोल दिये जाते है मनोरथी यहाँ से रथ बोड़ाकर अपने घर ले जाते है दूसरे दिन फिर माता को तट पर पानी पिलाने लाते है तीसरे दिन माता जी को नदी पोखर में ठंठी कर विदाई दी जाती है ओर पर्व का समापन हो जाता है।






























