अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का जन्म 8 मार्च, 1908 को हुआ था, जब 15,000 महिलाओं ने न्यूयॉर्क शहर की सड़कों पर अपने अधिकार को लेकर प्रदर्शन किया, कम घंटे, बेहतर वेतन और मतदान का अधिकार उनकी मांगे थी। पहला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम 1911 में आयोजित किया गया था, उसके बाद ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में आयोजित किया गया था।
धार@टीम भारतीय न्यूज़
समाज का दर्पण हैं महिलाएं वर्तमान स्थिति में नारी ने जो साहस का परिचय दिया है, वह आश्चयर्यजनक है। आज नारी की भागीदारी के बिना कोई भी काम पूर्ण नहीं माना जा रहा है। समाज के हर क्षेत्र में उसका परोक्ष – अपरोक्ष रूप से प्रवेश हो चुका है।
उसका एक उदहारण धार जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति मालती मोहन पटेल जिन्होंने आदिवासी समाज की महिलाओ के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा हे इतने बड़े पद पे रहते हुवे भी कभी अपने पद का घमंड नहीं किया समाज को उनपे गर्व हे जिन्होंने समाज का प्रदेश और देश मे नाम बढ़ाया
आज तो कई ऐसे प्रतिष्ठान एवं संस्थाएं हैं, जिन्हें केवल नारी संचालित करती है। हालांकि यहां तक का सफर तय करने के लिए महिलाओं को काफी मुश्किलों एवं संघर्षों का सामना करना पड़ा है और महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए अभी आगे मीलों लम्बा सफर तय करना है, जो दुर्गम एवं मुश्किल तो है लेकिन महिलाओं ने ही ये साबित किया है कि वो हर कार्य को करने में सक्षम हैं।आज की महिलाएं हर मामले में आत्मनिर्भर और स्वतंत्र हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। हमें महिलाओं का सम्मान जेंडर के कारण नहीं, बल्कि स्वयं की पहचान के लिए करना होगा। हमें यह स्वीकार करना होगा कि घर और समाज की बेहतरी के लिए पुरुष और महिला दोनों समान रूप से योगदान करते हैं। नव जीवन को धरती पर लाने वाली महिला है। हर महिला विशेष होती है, चाहे वह घर पर हो या ऑफिस में।
वह अपने आस-पास की दुनिया में बदलाव ला रही हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों की परवरिश और घर बनाने में एक प्रमुख भूमिका भी निभाती है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उस महिला की सराहना करें और उसका सम्मान करें जो अपने जीवन में सफलता हासिल कर रही हैं और अन्य महिलाओं और अपने आस-पास के लोगों के जीवन में सफलता ला रही हैं।






























