इतिहासकार डाॅ. यादव ने स्वतंत्रता सेनानी चौबे दादा को याद करते हुए कहा-
वे सच्चे सेनानी थे, उन्होंने पेंशन लेने से इंकार कर दिया।
बड़वानी@टीम भारतीय न्यूज़
दादा ने गुलामी के दिन देखे और उन्होंने आज़ादी की लड़ाई लड़ी। उन्होंने आजाद भारत को भी देखा। एक बार मुझे भी उनसे इन तीनों दौरों के बारे में चर्चा करने का अवसर मिला था। दादा सौ वर्ष तक जीवित रहे और किसी भी व्यक्ति का एक शताब्दी तक जीवित रहना बहुत बड़ी बात है। आजादी की लड़ाई के ऐसे ही गुमनाम सेनानियों ने त्याग किया, जेल गये, अंग्रेजों के द्वारा दिया गया अपमान और यातनाएं सहीं। अमृत महोत्सव के दौरान उन्हें स्मरण करना उनके प्रति सच्ची कृतज्ञता ज्ञापित करना है। ये बातें इतिहासकार और अवधेष प्रतापसिंह विश्वविद्यालय रीवा के पूर्व कुलपति डाॅ. शिवनारायण यादव ने शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत स्वतंत्रता सेनानी श्री नारायण चौबे के व्यक्तित्व और योगदान पर परिचर्चा तथा श्रद्धांजलि कार्यक्रम में कहीं।
डाॅ. यादव ने कहा कि दादा सच्चे सेनानी थे। उन्हें प्रमाण-पत्र तो मिला लेकिन उन्होंने पेंशन लेने से इंकार कर दिया था। दादा का कहना था कि कोई बच्चा अपनी मां की सेवा करता है तो क्या बदले में कोई शुल्क लेता है। भारत मां के लिए मैं जो कुछ भी कर सका, उसके बदले में अगर मैं कोई सुविधा लेता हूं तो यह मेरे लिए धिक्कार की बात होगी। दादा सौ वर्ष की आयु में भी बिना चश्मा के पढ़ लेते थे। मैं युवाओं से आग्रह करता हूं कि वे दादा से सीखें तथा उनके आदर्शों का पालन करें।
इस अवसर पर प्राचार्य डाॅ. एनएल गुप्ता, राजनीति विज्ञान विभाग की अध्यक्षा डाॅ. कांता अलावा, डाॅ. मीनाक्षी पंवार, डाॅ. अभिलाषा साठे सहित युवा विद्यार्थियों ने श्रद्धासुमन अर्पित किये। प्राचार्य डाॅ. गुप्ता ने कहा कि दादा सिद्धांतवादी थे। मैं उनसे चार-पांच बार मिला। वे अंत तक सक्रिय रहे। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी होने का कोई भी व्यक्तिगत लाभ नहीं लिया।
कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव की सार्थकता यही है कि हम उन सेनानियों के बारे में जान पा रहे हैं जिनके नाम इतिहास की पुस्तकों में या सरकारी रिकाॅर्ड में दर्ज नहीं हैं। मेरा सौभाग्य रहा कि मैंने पांच वर्षों तक दादा का सान्निध्य प्राप्त किया और उनके मुख से आजादी की लड़ाई के बारे में सुना। इतिहास में स्नातकोत्तर राहुल मालवीया ने रिसर्च पर आधारित तथ्य प्रस्तुत करते हुए श्री नारायण चौबे के जीवनवृत्त और योगदान के बारे में जानकारी दी।
इस अवसर पर अंतिम मौर्य, किरण वर्मा, रीना मौर्य, अंकित काग, दीक्षा चोहान, राहुल भंडोले, राहुल वर्मा, राहुल सेन, नितिका गुप्ता, रंजना बिल्लौरे, स्वाति यादव, कोमल सोनगड़े, वर्षा मालवीया, नंदिनी मालवीया, योगिता राठौड़,, उमा फूलमाली, नमन मालवीया, नंदिनी अत्रे साक्षी परमार एवं वर्षा मुजाल्दे सहित विद्यार्थियों ने श्रद्धांजलि दी।






























