भारतीय किसान संघ मालवा प्रांत के विकासखंड तिरला के पदाधिकारियों ने किसानों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन मुख्यकार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत तिरला के माध्यम से दिए गए। किसान संघ ने केंद्र और राज्य सरकार से कृषि, सिंचाई, बिजली, राजस्व, फसल बीमा, खाद-बीज, किसान सम्मान निधि और भूमि अधिग्रहण से जुड़े कई मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की है।
धार@साबिर खान fm
किसान संघ ने अपने ज्ञापन में कहा है कि संगठन किसानों के हितों को लेकर लगातार काम करता है और वर्तमान में किसानों के सामने कई महत्वपूर्ण समस्याएं हैं। संगठन ने केंद्र सरकार से कृषि आदान और कृषि यंत्रों पर जीएसटी समाप्त अथवा न्यूनतम करने, सभी फसलों के लिए लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और कृषि उत्पादों की आयात-निर्यात नीति को किसान हितैषी बनाने की मांग की है।
जीएम फसलों और कृषि आदानों को लेकर मांग
ज्ञापन में भारतीय किसान संघ ने जीएम फसलों और बीजों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की मांग की है। इसके साथ ही कृषि यंत्रों, रासायनिक दवाइयों और बीजों पर जीएसटी की दर न्यूनतम करने की मांग रखी गई है।
किसान संघ ने सभी फसलों की समर्थन मूल्य पर वर्षभर खरीदी की व्यवस्था करने तथा किसान सम्मान निधि में वृद्धि कर इसे 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर करने की मांग भी रखी है।
संगठन ने जैविक खेती करने वाले किसानों को भी रासायनिक खाद पर मिलने वाली सब्सिडी के अनुरूप प्रोत्साहन राशि देने और जिला मुख्यालय तथा तहसील स्तर पर जैविक बाजार शुरू करने की मांग की है।
फसल बीमा में खेत को इकाई बनाने की मांग
फसल बीमा योजना को लेकर किसान संघ ने सर्वे प्रक्रिया में बदलाव की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि सैटेलाइट या रिमोट सेंसिंग आधारित सर्वे के स्थान पर सुधार होने तक फसल कटाई प्रयोग अथवा नेत्रांकन सर्वे कराया जाए।
संगठन ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खेत को इकाई मानने, दावा राशि के भुगतान में पारदर्शिता रखने और वास्तविक उपज, थ्रेसहोल्ड उपज तथा उपज में कमी से संबंधित रिपोर्ट किसानों को उपलब्ध कराने की मांग की है। केला और मिर्च जैसी फसलों को भी फसल बीमा योजना में शामिल करने की मांग रखी गई है।
सोयाबीन समेत खरीफ फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी
किसान संघ ने सोयाबीन की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए पंजीयन शुरू करने की मांग की है। इसके साथ ही धान, मक्का, ज्वार और बाजरा सहित खरीफ फसलों की सरकारी खरीदी समर्थन मूल्य पर करने की मांग की गई है।
कृषि उपज मंडियों में आधुनिक गुणवत्ता परीक्षण, डोकेज टेस्टिंग और ग्रेडिंग मशीनें लगाने तथा ट्रैक्टर-ट्रॉली को बड़े तौल कांटों पर तौलने की व्यवस्था करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
खाद की उपलब्धता और कीमतों का मुद्दा
ज्ञापन में रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर भी मांग उठाई गई। किसान संघ का कहना है कि किसानों को खाद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा है। संगठन ने पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने, एनपीके खाद पर डीएपी की तरह सब्सिडी देने और खाद वितरण व्यवस्था को सरल बनाने की मांग की है।
साथ ही अमानक कृषि आदानों की बिक्री पर रोक लगाने, गुणवत्ता जांच के बाद ही कृषि आदानों की बिक्री की अनुमति देने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान करने की मांग की गई है।
धार को अल्पवर्षा प्रभावित जिला घोषित करने की मांग
धार जिले से जुड़े ज्ञापन में इस वर्ष कम बारिश का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। भारतीय किसान संघ ने धार जिले को सूखाग्रस्त अथवा अल्पवर्षा प्रभावित जिला घोषित करने की मांग की है।
संगठन ने प्रभावित किसानों का फसल क्षति सर्वे जल्द कराने और नियमानुसार राहत राशि, फसल बीमा, कृषि इनपुट सहायता, ऋण संबंधी राहत तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की मांग की है।
रबी सीजन के लिए कम पानी में होने वाली फसलों के बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
नर्मदा जल से हर खेत को सिंचाई देने की मांग
किसान संघ ने धार जिले के प्रत्येक गांव तक सिंचाई के लिए नर्मदा जल पहुंचाने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि जिले में कई सिंचाई परियोजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन काम की गति धीमी होने के कारण किसानों को समय पर इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सरदारपुर माही परियोजना के अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा करने, बदनावर माइक्रो इरिगेशन परियोजना में तेजी लाने और मांडव क्षेत्र से लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से नर्मदा जल पहुंचाने की योजना पर जल्द काम शुरू करने की मांग की गई है।
इसके अलावा बंद पड़ी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने और नहरों की समय रहते मरम्मत व सफाई कराने की मांग भी की गई है।
बिजली और ट्रांसफार्मर को लेकर कई मांगें
किसान संघ ने किसानों को सिंचाई के लिए निर्धारित अवधि में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की है। ज्ञापन में दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने के लिए ‘ट्रांसफार्मर एंबुलेंस सेवा’ शुरू करने और 24 घंटे के भीतर ट्रांसफार्मर बदलने की मांग रखी गई है।
इसके साथ ही अधिक भार वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, ट्रांसफार्मर बैंक बनाने, कृषि पंपों की गलत बिलिंग और अन्य विद्युत संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए समितियां गठित करने तथा कृषि क्षेत्र में नए स्थायी बिजली कनेक्शन देने की मांग की गई है।
पिछली रबी फसल में आग से हुए नुकसान का मुआवजा
किसान संघ ने पिछले रबी सीजन में विद्युत लाइन में फाल्ट के कारण गेहूं की फसल में आग लगने से प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया है। संगठन ने ऐसे किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
खरीफ फसलों में अतिवृष्टि, अफलन, वायरस और अन्य बीमारियों से हुए नुकसान की भरपाई तथा फसल बीमा का लाभ दिलाने की मांग भी की गई है।
भूमि अधिग्रहण में चार गुना मुआवजे की मांग
भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान संघ ने कहा है कि किसानों की भूमि पर सड़क, विद्युत लाइन, फैक्ट्री या किसी शासकीय अथवा निजी परियोजना से पहले किसानों को पूरी जानकारी दी जाए।
ज्ञापन में किसानों की आपत्तियों और सुझावों का निराकरण, संपत्तियों का उचित मूल्यांकन, ग्राम सभा की स्वीकृति और बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। संगठन ने किसानों की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण नहीं करने की मांग भी रखी है।
केंद्र के ज्ञापन में भूमि अधिग्रहण कानून को देश के सभी राज्यों में समान करने और केवल विकास योजनाओं तथा राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों के लिए अधिग्रहण किए जाने की मांग की गई है।
किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण प्रक्रिया सरल करने की मांग
किसान संघ ने बैंकों से कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC देने की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद भी किसानों को परेशान किए जाने की स्थिति में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
ज्ञापन में KCC के तहत 5 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराने तथा मुद्रा लोन की तर्ज पर तत्काल कृषि ऋण देने की प्रक्रिया बनाने की मांग की गई है।
सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए किसान हेल्पलाइन नंबर जारी करने और प्रत्येक जिले में समन्वय अधिकारी नियुक्त करने की मांग भी की गई है।
किसान सम्मान निधि की किस्तों को लेकर शिकायत
ज्ञापन में कहा गया है कि कुछ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्त मिल रही है, लेकिन मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं नए किसानों के नाम प्रधानमंत्री किसान योजना में जुड़ने के बावजूद मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि में नाम नहीं जुड़ने की बात भी किसान संघ ने उठाई है।
इसके समाधान की मांग की गई है।
तिरला-बोधवाड़ा सहकारी संस्था का कार्यालय शुरू करने की मांग
किसान संघ ने बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था मर्यादित तिरला के उपकेंद्र बोधवाड़ा से जुड़ा मुद्दा भी उठाया है। ज्ञापन के अनुसार, बोधवाड़ा उपकेंद्र का विभाजन 28 मार्च 2025 को हो चुका है, लेकिन कार्यालय संबंधी कार्य अभी भी तिरला संस्था से संचालित हो रहे हैं।
संगठन ने बोधवाड़ा केंद्र पर कार्यालय जल्द शुरू करने की मांग की है, ताकि किसानों को संबंधित सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकें और उनका समय व खर्च बच सके।
हजरतपुर-खरमपुर-बोधवाड़ा सड़क का काम शुरू करने की मांग
ज्ञापन में कहा गया है कि हजरतपुर से खरमपुर वाया बोधवाड़ा सड़क को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है। किसान संघ ने सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू करने की मांग की है।
इसके साथ ही ‘जय राम जी’ योजना के अंतर्गत खेत सड़क योजना शुरू करने और खेतों के परंपरागत रास्तों का नक्शे में अंकन करने की मांग की गई है।
किसानों को वर्षा मापक यंत्र और कृषि महाविद्यालय की मांग
किसान संघ ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्षा मापक यंत्र लगाने तथा वर्षा से संबंधित जानकारी समय-समय पर पंचायत भवन में प्रदर्शित करने की मांग की है।
संगठन ने प्रत्येक जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने और छोटी कक्षाओं से ही विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान की शिक्षा देने की मांग भी की है।
जैविक खेती और देशी गाय के दूध पर प्रोत्साहन
राज्य सरकार के नाम दिए गए ज्ञापन में जैविक खेती करने वाले किसानों को आर्थिक सहायता देने और जैविक खेती से संबंधित संगोष्ठियां आयोजित करने की मांग की गई है।
साथ ही भारतीय गोवंश और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए देशी गाय के दूध पर 10 रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि देने की मांग रखी गई है।
कृषि न्यायालय और किसान निगरानी समिति की मांग
किसान संघ ने प्रदेश में कृषि न्यायालय स्थापित करने तथा केंद्र और राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं की निगरानी के लिए जिला स्तर पर किसान प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए निगरानी समिति बनाने की मांग की है।
संगठन ने किसान मंच की बैठक प्रत्येक तीन माह में आयोजित करने और किसानों से जुड़े मामलों में नियमों के अनुसार काम नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की है।
प्याज-लहसुन के निर्यात और मंडियों को लेकर मांग
ज्ञापन में प्याज और लहसुन का पूरे वर्ष निर्यात किए जाने की मांग की गई है। प्रदेश में बंद पड़ी कृषि उपज मंडियों को फिर से शुरू करने की मांग भी रखी गई है।
इसके अलावा निजी भूमि पर लगे सागवान की कटाई के लिए किसानों को पात्रता देने, कृषि यंत्रों की बीमा राशि कम करने और कृषि यंत्रों पर अनुदान व कोटा बढ़ाने की मांग की गई है।
किसानों की समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग
भारतीय किसान संघ ने केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष कृषि, सिंचाई, विद्युत, राजस्व, खाद-बीज, फसल बीमा, ऋण, सड़क और भूमि अधिग्रहण से संबंधित विभिन्न मांगें रखी हैं। संगठन ने संबंधित विभागों से इन समस्याओं पर कार्रवाई कर किसानों को राहत देने की मांग की है।
इस मौके पर धर्मेंद्र पवार, विष्णु मुकाती, जितेंद्र पाटीदार, राधेश्याम बडगोता, मोहनजी बोरदिया, गोपाल पटेल, विष्णु कामदार, मुकेश पाटीदार, धर्मेंद्र सेठ, स्वप्निल पाटीदार, जगदीश पाटीदार, प्रदीप पाटीदार, महेश पूरी, संदीप लोधा, पंकज जाट, ठा. जुझारसिंह तवँर ठि. धामन्दा, कन्हैया लाल राठौर लौटारी खुर्य, कु. दिपक सिंह राठोर लौहारी खुर्द , गन्दालाल सोनगरा धामन्दा, मोहन लालजी पाटीदार, कांती सं प्रान्त सदस्य,प्यारे लाल पाटीदार धामन्दा, शिवनारायाणपाटीदार धामन्दा आदि उपस्थित रहे।






























