मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने झाबुआ जिले के दौरे के दौरान प्राकृतिक खेती कर रहीं कृषि सखियों और प्रगतिशील किसानों से संवाद कर उनके अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि झाबुआ में प्राकृतिक खेती की अपार संभावनाएं हैं और यह खेती न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में कृषि क्षेत्र में नए अवसर विकसित हुए हैं और “कृषि कल्याण वर्ष” के तहत किसानों के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
झाबुआ@साबिर खान fm
ग्राम देवीगढ़ की कृषि सखी संगीता डामोर ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब तक करीब 125 किसानों को बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक कृषि आदानों का प्रशिक्षण दिया है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने और बेहतर फसल प्रबंधन से गेहूं का उत्पादन 35 क्विंटल से बढ़कर 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया, जिससे उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने विकासखंड झाबुआ के ग्राम खेड़ी के प्रगतिशील किसान विमल भाबोर से भी प्राकृतिक खेती के अनुभव जाने। भाबोर ने बताया कि वे पिछले पांच वर्षों से जैविक और दो वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत अपने खेत पर जैव संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्थापित किया है, जहां तैयार किए गए प्राकृतिक कृषि आदानों का उपयोग स्वयं के साथ अन्य किसानों को भी उपलब्ध कराया जाता है।
विमल भाबोर ने बताया कि पहले खेती से उन्हें सालाना करीब 50 हजार रुपये का लाभ होता था, जबकि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी वार्षिक आय बढ़कर 1 से 1.5 लाख रुपये हो गई है। इसके अलावा नर्सरी, प्राकृतिक सब्जियों, फलों और वर्मी कम्पोस्ट से भी उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की लागत कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था विकसित करने का प्रभावी माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कृषि सखियों और किसानों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।






























