स्व सहायता समूह के खाते तो खुले, कब राशि आई कब निकल गये पता ही नहीं, आजीविका मिशन द्वारा हटा क्षेत्र में 1400 से ज्यादा समूह संचालित हो रहे, कागज, रजिस्टर में सिमटा रोजगार, पैसा कहां जा रहा पता नहीं..
दमोह@चतुर्भुज बिट्टू दुबे
देश व प्रदेश की सरकार जहां महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार प्रसार कर रही है वही योजनाओं का संचालन करने वाले विभाग इसे कैसे चूना लगाते है इसकी बानगी आजीविका मिशन के द्वारा किये जा रहे कार्यो को देखकर लगाया जा सकता है,
विधानसभा हटा की ग्राम पंचायत वर्धा के आदिवासी बाहुल्य गांव इमलिया में विभाग के अधिकारियो व एक प्रेरक महिला के द्वारा आदिवासी महिलाओं के दस्तावेज एकत्र कर वर्ष 2019-20 में हटा के यूनियन बैंक में खाते खुलवा दिये, उन्हे पशु पालन, किरान दुकान एवं अन्य रोजगार के नाम पर आजीविका मिशन द्वारा लोन स्वीकृत करके उनके खाते में पैसा डालना प्रारंभ कर दिये। पहले प्रेरक महिला समूह की अध्यक्ष सचिव के साथ बैंक आकर राशि निकलवाती है और उस राशि को अपने पास यह कह कर रखवा लेती कि इसे जमा करके ज्यादा राशि मिलेगी, यह क्रम तीन बार हुआ लेकिन बाद में समूह की महिलाओं ने बैंक आना ही बंद कर दिया। लेकिन राशि खाते में जमा होती गई और इसे निकाला भी गया, यह राशि कौन निकाल रहा था इसकी जानकारी खाताधारियों को पता ही नहीं चला। उल्टे प्रेरक महिला आदिवासी महिलाओं से ब्याज की राशि लेकर अपने पास ही रखने लगी।
मंगलवार को जनसुनवाई में इमलिया गांव से गौड देव स्व सहायता समूह, तेन्ददेव स्व सहायता समूह, चिरैया स्व सहायता समूह, बडे देव स्व सहायता समूह, खेर माता स्व सहायता समूह की अध्यक्ष सचिव ने हटा आकर एसडीएम अभिषेक ठाकुर एवं नगर निरीक्षक मनीष मिश्रा को जनसुनवाई आवेदन देकर बताया कि वर्धा गांव की मीनू दुबे व आजीविका मिशन के अधिकारियों ने दो वर्ष पूर्व गांव में आकर हम सभी का समूह गठित किया हटा के यूनियन बैंक में खाते खुलवाये, कहा कि अब तुम्हारे खाते में पैसा आते रहेगें, पहले मीनू दुबे हमें साथ लेकर बैंक आई वहां से राशि निकाली और बैंक के गेट पर ही राशि यह कह कर वापिस ले ली, कि इसे जमा करेगें तो और ज्यादा राशि मिलेगी। विगत दो वर्षो से हम कोई बैंक ही नहीं जा रहे और हमारे खाते से पैसे निकाले जा रहे है, दो साल उपरांत भी हम लोगों को एक रूपया हाथ नहीं लगा, उल्टे ब्याज के नाम पर मीनू द्वारा पैसा लिया जा रहा है। मीनू दुबे के इस कार्य में आजीविका मिशन के रामराज दुबे की भी सहभागिता है,
गांव के पांच समूह से करीब पांच लाख रूपयों का लेन देन हुआ लेकिन खाताधारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी,
जन सुनवाई में आवेदन देने आई सुहागरानी आदिवासी, सबरानी आदिवासी, दशोदा आदिवासी, दीपा आदिवासी, भूरी बाई आदिवासी, पानबाई आदिवासी, संजा रानी आदिवासी, तुलसा रानी आदिवासी, मनीषा आदिवासी, हल्की बहू ने प्रशासन से आजीविका मिशन द्वारा संचालित योजनाओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की साथ उच्चाधिकारियों को इस संबंध में आवेदन दिये,
एसडीएम अभिषेक ठाकुर ने आवेदन की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संबंधित को तलब करने के आदेश जारी किये साथ ही भरोसा दिलाया कि गरीब महिलाओं को उनका हक दिलाया जायेगा,
आजीविका मिशन के प्रबंधक नजीब मोहम्मद खान ने कहा क शिकायत आई है जांच के लिए विभाग के दो लोगों को कहा गया है, जांच रिपोर्ट आते ही कार्यवाही की जायेगी,
नगर निरीक्षक मनीष मिश्रा ने कहा कि प्रकरण की विवेचना की जा रही है, आरोप सिद्ध होने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जायेगा।






























