श्री रामचन्द्र जी गंगा तट पर आए और केवट से पार उतारने का अनुरोध किया । प्रभु –प्रेमी केवट ने अपनी चतुरता दिखलाई । पार उतारने के लिए अपनी शर्त रखी –पहले पाँव पखारुंगा ,फिर पार उतरूँगा … क्योंकि आपके
चरणों में ऐसी कोई जड़ी है जिसके स्पर्श –मात्र से वस्तु नारी बन जाती है …अहल्या जो पत्थर थी, वह साक्षात नारी हो गयी …मेरी नाव तो काठ की है ,जो पत्थर से अधिक कोमल है … यदि आपके चरणों के छूते ही नारी बन गई…फिर तो मेरी जीविका गयी…नाव तो नारी बन कर उड़ जाएगी …और मेरे पास कमाने-खाने का कोई साधन नहीं रहेगा …मै आपसे उतराई भी नहीं लूँगा …चाहे लक्ष्मण मुझे अपने बाण से बीन्ध ही क्यों न दें …बिना पाँव पखारे पार नहीं उतरूँगा … केवट की भक्ति देख प्रभु सीय और भ्र्राता की ओर…देख कर मुस्करा उठे …देखें यह प्रसंग …तुलसीदास के शब्दों में ….. मांगी नाव न केवटु आना…. केवट ने भगवान को चरण धोए है और गंगा पार कराएं भगवान केवट को 3 दिन लगे केवट ने मना कर दिया भगवान के चरणों को रधे में धारण किया भगवान वहां से आगे बढ़े और चित्रकूट में निवास किया उक्त विचार पंडित श्री बालकृष्ण गणेश दत्त शास्त्री ने ग्राम मुलथान में चल रही श्री राम कथा में कही, आज कथा में आपने श्री राम के शब्द की विशद व्याख्या की भवसागर पार होने के लिए राम नाम आधार है आपने कहा कि जगत में ऋषभ से कोई मीठा है तो वह है राम नाम और भगवान पुकारने से ही मिलता है इसलिए भगवान को भाव से कार्य जगत में राम नाम जी सा कोई नहीं है राम नाम महामंत्र आज कथा में ग्राम मुलथान के राजा साहब श्रीमंत रघुवीर सिंह जी नया करके व्यासपीठ का पूजन किया पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया साथ ही कथा का श्रवण लाभ लिया आज कथा में आदरणीय श्री ठाकुर साहब महेंद्र सिंह जी बना चाचू बना नवी कथा का लाइव आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोगों ने आकर के कथा का लाभ लिया।
कथा के छठे दिन मुलथान महाराजा साहब , महेंद्रसिहजीचाचूबन्ना, कथावाचक श्रीमनिषजी राठौड़ आदि ने आरती का लाभ






























