इंदौर में ‘Enhancing Access to Justice’ वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित | CJI जस्टिस सूर्यकांत बोले- संवाद, गरिमा और समावेशन से ही हर व्यक्ति तक पहुंचेगा न्याय…
इंदौर@साबिर खान fm
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार न्यायपालिका की भावना के अनुरूप उपलब्ध सभी संसाधनों के माध्यम से प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय परंपरा में विवादों के समाधान के लिए संवाद, समझाइश और मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज आधुनिक तकनीक के साथ इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए न्याय को अधिक सरल, सुगम और नागरिक केंद्रित बनाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव 8 अगस्त को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ‘Enhancing Access to Justice’ विषय पर आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत सहित सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ अधिकारी, न्यायिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
‘न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व लोकतंत्र के आधार’
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण भारतीय न्याय परंपरा को समृद्ध करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सम्मेलन की थीम ‘एक आवाज, सशक्त भविष्य, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच’ को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व लोकतंत्र के मूल आधार हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में पंच परमेश्वर की परंपरा के माध्यम से सदियों से विवादों का समाधान समझाइश और आपसी सहमति से किया जाता रहा है। आधुनिक न्याय व्यवस्था में भी मध्यस्थता के माध्यम से छोटे-छोटे विवादों का समाधान कर लंबित मामलों की संख्या कम करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय न्याय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संविधान में देश की हजारों वर्षों की न्याय परंपरा और आधुनिक संवैधानिक व्यवस्था का उत्कृष्ट संगम दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों को आम नागरिक न्याय प्राप्ति के विश्वसनीय केंद्र के रूप में देखते हैं और राज्य सरकार सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कई महत्वपूर्ण पुस्तकों और योजनाओं का विमोचन
सम्मेलन के दौरान ‘Ensuring Access Protecting Rights Building Futures’ पुस्तक सहित विधिक सेवा योजनाओं से संबंधित प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इसके साथ ही ‘न्याय सबके लिए’, ब्रेल लिपि में विधिक मार्गदर्शिका और ‘न्याय के स्वर’ का भी विमोचन हुआ।
कार्यक्रम में नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) का थीम सॉन्ग प्रस्तुत किया गया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने NALSA Education Scheme तथा थीम सॉन्ग का इंडियन साइन लैंग्वेज में शुभारंभ किया।
इसके अलावा ‘विवाद से सहमति’ मध्यस्थता सर्टिफिकेट कोर्स तथा ‘Justice to Children Litigation Fellowship Programme’ का भी शुभारंभ किया गया।
अंग्रेजों के दौर के गैर-जरूरी कानूनों को हटाने की बात
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में बदलाव का दौर चल रहा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के दौर के कई गैर-जरूरी कानूनों को समाप्त कर न्याय व्यवस्था को अधिक सरल और सुलभ बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने आधुनिक न्याय व्यवस्था में ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, डिजिटल डेटा संग्रह और आधुनिक न्याय प्रबंधन जैसी तकनीकों के उपयोग का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और नागरिकों के लिए कानून को अधिक सरल बनाने की दिशा में भी बदलाव किए जा रहे हैं।
समान नागरिक संहिता का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) से संबंधित पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता से जुड़े विधायी कदम उठाए हैं और इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के अधिकारों तथा न्याय की व्यवस्था को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि सरकार सभी धर्मों का सम्मान करती है और हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार तथा सर्वधर्म सद्भाव बनाए रखना सरकार की प्रतिबद्धता है।
पेपर लीक और धोखाधड़ी मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट
मुख्यमंत्री ने युवा वर्ग से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पेपर लीक और धोखाधड़ी जैसे मामलों में तेजी से कार्रवाई के लिए प्रदेश में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए गए हैं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में इन न्यायालयों के गठन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
‘न्याय में देरी भी अन्याय’
डॉ. यादव ने कहा कि न्याय में देरी भी एक प्रकार से अन्याय है। उन्होंने प्रदेश में साइबर सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वचालित प्रणाली और ई-जीरो एफआईआर जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से पुलिस प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल आम नागरिक के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने और समय पर न्याय उपलब्ध कराने के लिए होना चाहिए।
अहिल्याबाई और सम्राट विक्रमादित्य के न्याय का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने मालवा की ऐतिहासिक न्याय परंपरा का उल्लेख करते हुए लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और सम्राट विक्रमादित्य के उदाहरण प्रस्तुत किए।
उन्होंने कहा कि लगभग 250 वर्ष पहले लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने इंदौर में सुशासन और न्याय की मिसाल कायम की। मुख्यमंत्री ने उनके शासनकाल में प्रजा के साथ समान व्यवहार और न्याय को लेकर प्रचलित ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख किया।
उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता का भी उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में न्याय को व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर रखा गया है।
CJI जस्टिस सूर्यकांत बोले- संवाद से ही संभव है न्याय तक पहुंच
कार्यक्रम को भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ‘सशक्त भविष्य, गरिमा और समावेशन’ केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि विधिक सहायता की वास्तविक भावना हैं।
उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के न्याय के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लिए न्याय सबके लिए समान था। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझना न्याय तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि केवल कानून बनाकर प्रत्येक व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इसके लिए संवाद, संवेदनशीलता और स्थानीय परिस्थितियों की समझ जरूरी है।
‘पीड़ित को पहले सुना जाना जरूरी’
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी विवाद में मध्यस्थता की प्रक्रिया सामने वाले व्यक्ति को सुनने से शुरू होती है। न्याय मिलने से पहले पीड़ित को यह भरोसा होना चाहिए कि उसकी समस्या और पीड़ा को कोई गंभीरता से सुन रहा है।
उन्होंने कहा कि गरीब, आर्थिक रूप से कमजोर, महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों को विधिक सहायता देना कोई चैरिटी नहीं, बल्कि उन्हें उनके अधिकारों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पैरा लीगल वॉलंटियर्स समाज के सबसे करीब काम करते हैं और उनकी भूमिका अंतिम व्यक्ति तक कानूनी सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण है।
स्थानीय समस्याओं के लिए स्थानीय समाधान जरूरी
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वेस्ट जोन में अलग-अलग समुदायों की समस्याएं अलग प्रकृति की हैं। मध्यप्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों, गोवा के मछुआरा समुदाय, गुजरात के प्रवासी श्रमिकों और मुंबई की महिलाओं की समस्याएं एक जैसी नहीं हो सकतीं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक समस्या के समाधान के लिए संबंधित समुदाय की भाषा, परिस्थिति और जरूरतों को समझना होगा। उन्होंने इसकी तुलना डॉक्टर और मरीज के बीच होने वाले संवाद से करते हुए कहा कि समस्या को समझने के लिए संवाद सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।
‘जो हमारे पास नहीं आया, हमें उसके पास पहुंचना होगा’
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्याय व्यवस्था की असली परीक्षा यह नहीं है कि जो व्यक्ति मदद मांगने हमारे पास पहुंच गया, उसकी सहायता कर दी जाए। असली चुनौती यह है कि जो व्यक्ति न्याय की तलाश में हमारे पास नहीं पहुंच पाया, हम उसके पास कैसे पहुंचें।
उन्होंने कहा कि समानता का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि समाज का कोई व्यक्ति पीछे न छूटे। न्याय और समानता प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
सुशासन का वास्तविक आधार न्याय: अर्जुन राम मेघवाल
केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक उसकी पहुंच सुनिश्चित करना सरकार और व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 39A का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक या सामाजिक स्थिति के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की न्याय परंपरा में न्याय, समानता, प्राकृतिक न्याय, मध्यस्थता और लोक कल्याण की भावना रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, विशेष रूप से Artificial Intelligence (AI), न्याय प्रक्रिया को बहुभाषीय और अधिक सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने मध्यप्रदेश की न्याय परंपरा में राजा भोज और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि सुशासन का वास्तविक आधार न्याय है।
मध्यस्थता से विवादों का सरल समाधान
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि NALSA की शिक्षा योजना, साइन लैंग्वेज में थीम सॉन्ग और ब्रेल लिपि में विधिक मार्गदर्शिका जैसे प्रयास न्याय की पहुंच को अधिक व्यापक बनाने में मदद करेंगे।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से परिवार, पड़ोस और साझेदारी से जुड़े विवादों का समाधान आपसी सहमति से किया जा सकता है। इसमें किसी पक्ष पर समाधान थोपा नहीं जाता, बल्कि दोनों पक्षों को सहमति से समाधान तक पहुंचने का अवसर मिलता है।
‘न्याय पाने की सुगम पहुंच सभी का अधिकार’
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन ने कहा कि न्याय केवल कानून और न्यायालयों की व्यवस्था तक सीमित नहीं है। नागरिकों को यह भरोसा होना चाहिए कि मुश्किल की स्थिति में वे संबंधित मंच तक पहुंचेंगे और उन्हें समाधान प्राप्त होगा।
उन्होंने कहा कि न्याय प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए संवाद, सम्मान और समानता पर जोर देना आवश्यक है। उन्होंने मध्यस्थता को न्याय व्यवस्था में मामलों के समाधान का प्रभावी माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग के साथ-साथ जनजातीय समुदायों के लिए भी न्याय की समान और सुगम पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
तकनीक से विधिक सेवाओं की पहुंच हुई आसान
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विवेक रुसिया ने कहा कि यह सम्मेलन न्याय तक पहुंच के संकल्प को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि Access to Justice केवल संवैधानिक विचार नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने लोक अदालतों, कारागार सुधार, जनजातीय क्षेत्रों तक विधिक सेवाओं के विस्तार, प्रशिक्षित मध्यस्थों के माध्यम से विवादों के समाधान और दिव्यांगजनों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचारों के कारण समाज के विभिन्न वर्गों तक विधिक सेवाओं की पहुंच पहले की तुलना में अधिक सरल और सुगम हुई है।
इनकी रही प्रमुख मौजूदगी
सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस विजय बिश्नोई, जस्टिस आलोक अराधे, जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव सचदेवा, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस आनंद पाठक, इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी तथा न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस आनंद पाठक ने आभार व्यक्त किया।






























