खुशियों की नगरी मांडू में उत्सव का चौथा संस्करण का चौथा दिन खास रहा। तरकश बैंड दल ने मांडू उत्सव को और भी खास बना दिया। यहां ख्याति प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय बैंड की प्रस्तुति ने रंगारंग कार्यक्रम को काफी ऊंचाइयों प्रदान की।
मांडू@साबिर खान
मांडू का विशेष रुप से सुर और ताल से नाता रहा है। यहां रानी रूपमती के सुर की मिठास आज भी महसूस की जाती है। ऐसी नगरी में जब तक तरकश बैंड ने अपनी प्रस्तुति दी तो पर्यटक आनंदित हो गए। जब प्रस्तुति में इतनी खूबसूरती हो तो निश्चित रूप से श्रोता भी इसमें अपने आप को थिरकने से नहीं रोक पाते हैं। पर्यटकों ने उम्दा प्रस्तुति में सर्द मौसम की चिंता न करते हुए नृत्य किया। यहीं से मांडू उत्सव में नया उत्साह पैदा हुआ। वहीं स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति के क्रम में नृत्यांगना ईशिका मुकाती की प्रस्तुति खास रही। बहुत कम उम्र में अच्छा मुकाम प्राप्त किया है। स्थानीय कलाकार होने के बावजूद बड़े मंच पर अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। वही सूफी गायन मांडू की अपनी पहचान है। सूफीवाद मांडू से कुछ हद तक जुड़ा रहा है। ऐसे ही सुफी गायक गुरमीत सिंह डंग ने अपनी गायकी से यहां पर सब का मन मोह लिया। गुरमीत सिंह डंग लगातार बड़े मंच पर प्रस्तुति करते रहे हैं। उन्होंने जब मंगलवार की शाम को भजन की प्रस्तुति दी तो सभी ने उनके मीठे कंठ से निकले स्वरों की प्रशंसा की। वहीं मांडू उत्सव में दिन भर नियमित गतिविधियों का क्रम जारी रहा।






























