टीकमगढ़ में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक, पीतल शिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने और कुंडेश्वर में पर्यटन बढ़ाने पर जोर; गौशालाओं को ₹109.79 करोड़ की DBT सहायता..
टीकमगढ़@साबिर खान fm
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्थानीय पारंपरिक हुनर, नवाचार और उपलब्ध संसाधनों को रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जाए। युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए उद्योग, व्यापार, कृषि और पशुपालन सहित सभी क्षेत्रों की स्थानीय संभावनाओं का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 21 अगस्त को मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत टीकमगढ़ में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक ली। बैठक में उन्होंने जिले की आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और विकास की संभावनाओं को लेकर अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा की और इन क्षेत्रों के लिए रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए।
‘वोकल फॉर लोकल’ के तहत स्थानीय उत्पादों को मिलेगी पहचान..
मुख्यमंत्री ने कहा कि टीकमगढ़ के पारंपरिक कौशल और स्थानीय उत्पादों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के सिद्धांत के अनुरूप राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जाएं।
उन्होंने विशेष रूप से पीतल की मूर्तियों सहित स्थानीय कला और शिल्प को प्रोत्साहित करने, इनके लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और स्थानीय प्रतिभाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जिले में किए जा रहे सफल स्थानीय प्रयासों और नवाचारों को चिन्हित कर उन्हें योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सके।
उद्योग और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर फोकस..
बैठक में मुख्यमंत्री ने नवीन उद्योग नीतियों और ऋण आधारित योजनाओं का लाभ लेने के लिए इच्छुक उद्यमियों को प्रोत्साहित करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं को रोजगार में बदलना विकास की प्राथमिकता होनी चाहिए। कृषि, व्यापार, उद्योग, पशुपालन और अन्य क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों का बेहतर इस्तेमाल कर युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।
पशुपालन को आय का बेहतर साधन बनाने पर जोर..
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पशुपालन को किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए लाभकारी व्यवसाय बनाने पर भी विशेष जोर दिया।
उन्होंने अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों और गोपालकों को सहकारी क्षेत्र से जोड़ने तथा गौशालाओं में अच्छी नस्ल के पशुओं के संवर्धन और नस्ल सुधार के लिए आवश्यक प्रयास करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी नस्ल की बछियों की उपलब्धता बढ़ने से गोपालकों को लाभ मिलेगा और कृषि के साथ पशुपालन भी ग्रामीण परिवारों की आय का बेहतर माध्यम बन सकेगा।
कुंडेश्वर धाम और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा..
टीकमगढ़ जिले में धार्मिक और पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने पर भी बैठक में चर्चा हुई। कुंडेश्वर धाम के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को रोजगार एवं आर्थिक अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
इससे स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, छोटे व्यवसाय और अन्य सेवा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
दीर्घकालीन विकास योजना में जनता के सुझाव होंगे शामिल..
जिला विकास सलाहकार समिति द्वारा उद्योग, व्यापार, कृषि, जल संरचनाओं के संरक्षण, निर्यात, खनिज, पर्यावरण और रोजगार सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए दीर्घकालीन विकास योजना तैयार करने में सुझाव दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। जनभागीदारी, सामुदायिक भावना और स्थानीय ज्ञान एवं अनुभव का प्रभावी उपयोग भी विकास को नई दिशा दे सकता है।
बैठक में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने जिले के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर सुझाव दिए। जिला प्रशासन इन सुझावों और अनुशंसाओं को संबंधित विकास योजनाओं एवं कार्यों में शामिल करने की दिशा में कार्रवाई करेगा।
सामाजिक भागीदारी पर भी मुख्यमंत्री का जोर..
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोगों से सामाजिक विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। उन्होंने सामुदायिक विवाहों को प्रोत्साहित करने तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को आपसी सौहार्द के साथ मनाने की बात कही।
उनके अनुसार जनभागीदारी के माध्यम से विकास कार्यों को अधिक प्रभावी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकता है।
गौशालाओं को ₹109.79 करोड़ की DBT सहायता..
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर गौशालाओं के लिए ₹109.79 करोड़ की अनुदान राशि DBT के माध्यम से वितरित की।
उन्होंने बताया कि गौशालाओं में गौवंश के भरण-पोषण के लिए मिलने वाले अनुदान को बढ़ाकर ₹40 प्रति गौवंश प्रतिदिन किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में गौशालाओं को अनुदान वितरण के लिए ₹620.50 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
सिंगल क्लिक DBT से पारदर्शी भुगतान..
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौशालाओं को अनुदान देने की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए सिंगल क्लिक DBT प्रणाली लागू की गई है। इसके माध्यम से अनुदान सीधे गौशालाओं के बैंक खातों में पहुंचाया जा रहा है।
सरकार के अनुसार इससे भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने में मदद मिली है।
प्रदेश में 1 हजार से अधिक नई गौशालाओं का संचालन..
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार गठन के बाद से प्रदेश में 1 हजार से अधिक नवीन गौशालाओं का संचालन शुरू किया जा चुका है। इनमें 2 लाख से अधिक गौवंश के व्यवस्थापन का दावा किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौशालाओं के बेहतर संचालन और गौवंश के संरक्षण के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है।,






























