पाक रमजान महीने के दौरान मुस्लिम समाज में रोजा रखने का विशेष महत्व माना जाता है। इसी कड़ी में धार शहर के भाजी बाजार क्षेत्र में एक खास और प्रेरणादायक पल देखने को मिला, जब महज 8 साल के नवाल मंसूरी, पिता इलयास मंसूरी, ने अपना पहला रोजा रखा।
धार@साबिर खान fm
इस मौके पर परिवार और मोहल्ले में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। बताया जा रहा है कि नवाल ने सुबह सहरी के समय पूरे उत्साह के साथ रोजा रखा और दिनभर संयम व सब्र के साथ रोजे का एहतराम किया। शाम को इफ्तार के वक्त परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने नवाल का उत्साह बढ़ाया और उसके पहले रोजे की खुशी मनाई।
परिजनों ने बताया कि रमजान का पाक महीना सब्र, इबादत और इंसानियत का संदेश देता है। ऐसे में बच्चों को छोटी उम्र से ही इस पवित्र परंपरा से जोड़ना उन्हें धार्मिक और नैतिक मूल्यों से परिचित कराता है। नवाल के पहले रोजे को लेकर परिवार के सदस्य काफी खुश नजर आए और उसे ढेरों दुआएं दीं।
इस दौरान परिवार के लोगों ने बताया कि नवाल ने पूरे दिन बिना किसी परेशानी के रोजा रखा नमाजे पढ़ी और इफ्तार के समय अल्लाह से सबकी सलामती और खुशहाली की दुआ की।
मोहल्ले के लोगों और रिश्तेदारों ने भी नवाल को पहले रोजे की मुबारकबाद दी और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। रमजान के पवित्र माह में इस तरह के छोटे-छोटे पल समाज में सकारात्मकता, भाईचारे और धार्मिक आस्था का संदेश भी देते हैं।
रमजान का महीना मुस्लिम समाज के लिए इबादत, संयम और सेवा का प्रतीक माना जाता है, जिसमें रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की जाती है और जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश दिया जाता है।
धार शहर में छोटे बच्चे द्वारा पहला रोजा रखने की यह खुशी परिवार और मोहल्ले के लिए एक यादगार पल बन गई।


































