पवित्र रमजान माह के दौरान मुस्लिम समाज में रोजा रखने की परंपरा विशेष महत्व रखती है। इसी क्रम में धार शहर की गुलमोहर कॉलोनी में एक खास और प्रेरणादायक पल देखने को मिला, जब महज 8 साल की सकीना, पिता जावेद खान, ने अपना पहला रोजा रखा। इस मौके पर परिवार और मोहल्ले में खुशी का माहौल देखने को मिला।
धार@साबिर खान fm
सकीना ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ सुबह सहरी के समय रोजा रखा और दिनभर संयम और धैर्य के साथ रोजा निभाया। शाम को इफ्तार के समय परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने सकीना का उत्साह बढ़ाया और उसके पहले रोजे की खुशी मनाई।
परिवार के लोगों ने बताया कि रमजान का महीना सब्र, इबादत और इंसानियत का संदेश देता है। ऐसे में छोटी उम्र में ही बच्चों को इस पवित्र परंपरा से जोड़ना उन्हें धार्मिक और नैतिक मूल्यों से परिचित कराता है। सकीना के पहले रोजे को लेकर परिवार के लोग काफी खुश नजर आए और उसे दुआएं दीं।
इस अवसर पर परिवार के सदस्यों ने बताया कि सकीना ने पूरे दिन बिना किसी परेशानी के रोजा रखा और इफ्तार के समय अल्लाह से सबकी सलामती और खुशहाली की दुआ की।
मोहल्ले के लोगों ने भी सकीना को पहले रोजे की मुबारकबाद दी और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। रमजान के पवित्र माह में इस तरह के छोटे-छोटे पल समाज में सकारात्मकता और भाईचारे का संदेश भी देते हैं।
रमजान का महीना मुस्लिम समाज के लिए इबादत, संयम और दान का प्रतीक माना जाता है, जिसमें रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की जाती है और जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश दिया जाता है।
धार में छोटी बच्ची द्वारा पहला रोजा रखने की यह खुशी पूरे परिवार और मोहल्ले के लिए एक यादगार पल बन गई।


































