महाराजा भोज शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, धार के भौतिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सागर सेन और उनके शोधार्थी विनय श्रीवास्तव को जर्मनी के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थान DESY (Deutsches Elektronen-Synchrotron), हैम्बर्ग में Small Angle X-ray Scattering (SAXS) तकनीक पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रयोग करने का अवसर मिला है।
धार@साबिर खान fm
यह परियोजना भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा वित्तपोषित है। इस प्रयोग के माध्यम से दोनों शोधकर्ता नैनोस्ट्रक्चर्ड पतली परतों (Nanostructured Thin Films) की सूक्ष्म संरचना और उनके इलेक्ट्रॉनिक गुणों का अध्ययन करेंगे।
क्या है SAXS तकनीक?
Small Angle X-ray Scattering (SAXS) एक अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें पदार्थ पर छोटे कोण पर एक्स-रे किरणें डाली जाती हैं और उनके प्रकीर्णन (scattering) का अध्ययन किया जाता है।
इससे पदार्थ की नैनोस्तरीय संरचना, कणों का आकार, वितरण, सतह की खुरदरापन और सूक्ष्म छिद्रों की जानकारी प्राप्त की जाती है।
सरल शब्दों में कहा जाए तो यह तकनीक पदार्थ के भीतर की “नैनो दुनिया की तस्वीर” लेने जैसी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी सफलता…
डॉ. सागर सेन ने बताया कि इस तकनीक के प्रयोग से स्पिन्ट्रॉनिक्स (Spintronics), बैटरी, कैपेसिटर, बायोटेक्नोलॉजी और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास में उपयोगी डेटा प्राप्त होगा।
DESY जैसे विश्वस्तरीय प्रयोगशाला में रिसर्च करना किसी भी वैज्ञानिक के लिए गर्व की बात है। इससे न केवल हमारे कॉलेज बल्कि पूरे प्रदेश की उच्च शिक्षा को नई पहचान मिलेगी— डॉ. सागर सेन, सहायक प्राध्यापक, भौतिकी विभाग
शोधार्थी विनय श्रीवास्तव की भूमिका..
इस अंतरराष्ट्रीय प्रयोग में शोधार्थी विनय श्रीवास्तव सक्रिय भूमिका निभाएंगे। वे IUAC परियोजना के तहत शोध कार्य कर रहे हैं।
उनका कहना है कि यह अनुभव कॉलेज के अन्य विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा में प्रेरित करेगा।
कॉलेज और प्रदेश के लिए गौरव का क्षण..
महाविद्यालय परिवार ने इस उपलब्धि पर डॉ. सेन और विनय श्रीवास्तव को बधाई दी है। प्राचार्य ने कहा कि— यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के डिग्री कॉलेजों के शोध स्तर को नई ऊँचाई प्रदान करेगी और यह सिद्ध करती है कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती।
प्रयोग का समय और स्थान..
यह प्रयोग 19 से 25 अक्टूबर 2025 के बीच DESY, हैम्बर्ग (जर्मनी) में सम्पन्न किया जाएगा।
डॉ. सागर सेन वर्तमान में महाराजा भोज शासकीय पीजी कॉलेज, धार में पदस्थ हैं और वहीं से अपने शोध कार्य का संचालन कर रहे हैं।



































