डीजे संचालकों को सुप्रिम कोर्ट और शासन के नियम-निर्देशों के बारे में दी जानकारी
धार@टीम भारतीय न्यूज़
ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग को लेकर प्रदेश के नए मुुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा आदेश जारी करने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। शनिवार को पुलिस कंट्रोल रूम में प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में धर्म गुुरूओं की बैठक ली। इसमें सभी को ध्वनि यंत्रों के उपयोग के संबंध में सुप्रिम कोर्ट के द्वारा दिए गए आदेश एवं राज्य शासन के आदेश के संबंध में जानकारी देकर 55 डेसिबल से अधिक आवाज का उपयोग ना करने की समझाईश दी गई। बैठक में शहरकाजी सहित अलग-अलग धर्मों से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद थे। अधिकारियों ने बताया कि धार्मिक स्थल में सुबह 6 बजे से शाम तक माईक और साउंड सिस्टम का प्रयोग किा जा सकता है। इधर इस मामले में शहरकाजी वकार सादिक ने अधिकारियों से कहा कि सभी मस्जिदों के सदर की बैठक लेकर उन्हें भी नियमों से अवगत कराएं। हम अपनी और से सभी को बताएंगे कि एक से अधिक माईको का उपयोग ना करें। स्पीकर भी एक ही रखे।
नियम का पालन करें, कार्रवाई से बचे
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सौहार्द्र के वातावरण के मध्य नियमों के पालन को लेकर सभी अपनी जिम्मेदारी समझे। धार्मिक स्थानों से सभी धर्म गुुुरू स्पीकरों को हटा लें। कार्रवाई की नौबत आए इस तरह की स्थिति उत्पन्न ना होने दें। नियमों का पालन नहीं किया जाता है प्रशासन की टीम पहुंचकर कार्रवाई करेगी। उल्लेखनीय है कि 55 डेसिबल की आवाज से अधिक ध्वनि ना होने का मतलब लाऊड स्पीकर पर पूर्णत: प्रतिबंध ही है। दरअसल 55 डेसिबल की ध्वनि दो लोगों के मध्य परस्पर चर्चा में सामान्य ध्वनि जितनी होती है। स्पीकरों के उपयोग से 55 डेसिबल के नियम का पालन नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में मस्जिदों से होने वाली नमाज की आवाज सहित मंदिरों से निकलने वाले भजनों की ध्वनि भी नियम के दायरे में प्रभावित होगी।
पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित बैठक में सीएसपी रवीन्द्र वास्कले, तहसीलदार दिनेश उईके, सीएमओ निशिकांत शुक्ला सहित कोतवाली थाना प्रभारी कमलेश शर्मा एवं नौगांव थाना प्रभारी मौजूद थे। विभिन्न समाजों एवं धर्म गुरूओं के साथ बैठक के पश्चात डीजे वाहन संचालकों के साथ बैठक हुई। इसमें उन्हें भी नियमों के संबंध में जानकारी देकर नियम तोड़ने पर कार्रवाई की बात कही है। बैठक से बाहर निकले डीजे संचालकों ने कहा कि इस नियम से तो हमारा धंधा ही लगभग बंद हो गया है।



































