UIMR से बदलेगा मालवा का भविष्य: इंदौर समेत 6 जिलों के 2781 गांवों में विकास, 5 लाख रोजगार का लक्ष्य..
भोपाल@साबिर खान fm
मध्यप्रदेश सरकार ने मालवा क्षेत्र के व्यापक और दीर्घकालिक विकास के लिए यूनिफाइड इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (UIMR) का महत्वाकांक्षी विजन प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में तैयार इस योजना का उद्देश्य इंदौर के विकास मॉडल को आसपास के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाकर ‘विकसित भारत @2047′ के लक्ष्य में मध्यप्रदेश की भागीदारी को मजबूत करना है।
योजना के तहत इंदौर के साथ उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर सहित कुल 6 जिलों, 38 तहसीलों और 2781 गांवों को जोड़ा जाएगा। इसका दायरा बढ़ाकर 16 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक किया गया है, जहां लगभग सवा करोड़ लोगों को आधुनिक आधारभूत सुविधाओं और आर्थिक अवसरों का लाभ मिलने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार के अनुसार, इस क्षेत्र को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने के लिए 13,500 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक और 14 नए औद्योगिक पार्क प्रस्तावित हैं। योजना के सफल क्रियान्वयन से स्थानीय युवाओं के लिए करीब 5 लाख रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। पीथमपुर को इलेक्ट्रिक व्हीकल एवं एडवांस इंजीनियरिंग हब, उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी को एंकर सिटी तथा रतलाम को लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की योजना है।
UIMR का प्रमुख लक्ष्य पूरे क्षेत्र में ’60 मिनट एक्सेस’ कनेक्टिविटी विकसित करना है। इसके लिए इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, इंदौर-भोपाल एक्सप्रेसवे, मेट्रो विस्तार और बेहतर सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क पर कार्य किया जाएगा। साथ ही यह क्षेत्र दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से जुड़कर उद्योग और निर्यात को नई गति देगा।
योजना में देश के पहले लैंड पूलिंग मॉडल का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रथम चरण में शामिल 17 गांवों के किसानों को उनकी 60 प्रतिशत विकसित भूमि वापस देने का प्रावधान किया गया है, ताकि वे विकास प्रक्रिया में सीधे भागीदार बन सकें।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट नीति लागू करने का प्रस्ताव है, जिसके तहत जल स्रोतों और वन क्षेत्रों की सुरक्षा, व्यापक वृक्षारोपण, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली तथा अक्षय ऊर्जा आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसके अलावा उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर को जोड़कर आध्यात्मिक एवं विरासत पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना बनाई गई है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक पर्यटन क्षेत्र का राज्य की जीडीपी में 10 प्रतिशत योगदान सुनिश्चित करना है।
सरकार के अनुसार, मध्यप्रदेश महानगरीय क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम, 2025 के माध्यम से वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित शहरी नियोजन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे आने वाले दशकों की आबादी और आधारभूत संरचना की जरूरतों के अनुरूप योजनाएं पहले से तैयार की जा सकें।
नोट: यह समाचार मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जारी योजना और आधिकारिक दावों पर आधारित है। परियोजना के विभिन्न लक्ष्य और अनुमान योजना के सफल क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।






























