मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में राज्य सरकार भव्य सरस्वती लोक का निर्माण कराएगी। साथ ही राजा भोज की कर्मस्थली धार में राजा भोज शोध संस्थान की स्थापना भी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भोजशाला प्राचीन काल में ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और संस्कृत अध्ययन का प्रमुख केंद्र रही है और सरकार इसके गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
भोपाल@साबिर खान fm
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रिपरिषद की बैठक से पूर्व अपने संबोधन में कहा कि राजा भोज द्वारा स्थापित भोजशाला सदियों तक शिक्षा, संस्कृति और शास्त्रार्थ का महत्वपूर्ण केंद्र रही। यहां देश के विभिन्न क्षेत्रों से विद्यार्थी और विद्वान अध्ययन एवं शोध के लिए आते थे। राज्य सरकार इस ऐतिहासिक धरोहर को उसके प्राचीन वैभव के अनुरूप विकसित करने की दिशा में कार्य करेगी।
उन्होंने कहा कि भोजशाला परिसर में विकसित किए जाने वाले सरस्वती लोक का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा। इसके साथ ही धार में प्रस्तावित राजा भोज शोध संस्थान राजा भोज के योगदान, मालवा के इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा पर शोध एवं अध्ययन का प्रमुख केंद्र बनेगा।
मुख्यमंत्री ने भोजशाला आंदोलन से जुड़े उन लोगों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने आंदोलन के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया। उन्होंने घोषणा की कि आंदोलन में शहीद हुए स्वर्गीय बनसिंह, स्वर्गीय अंतरसिंह और स्वर्गीय लक्ष्मण सिंह के निकटतम परिजनों को राज्य सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण और विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा भोजशाला के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसके समग्र विकास की दिशा में कार्य करेगी।


































