पूज्य गुरु भगवंत मधु बालाजी सतीयाजी के पावन सानिध्य में, धर्मनगरी धार में त्याग और समर्पण का एक अद्वितीय अध्याय लिखा जा रहा है। श्री अमित जैन की धर्मपत्नी श्रीमती समीक्षा जैन जैन धर्म की सबसे कठिन और पवित्र साधनाओं में से एक ‘सिद्धि तप’ कर रही हैं। जैन धर्म में ‘बिना अन्न-जल के’ उपवास को निर्जला उपवास कहा जाता है।
धार@साबिर खान fm
यह एक बहुत ही कठोर तपस्या है, जिसमें व्यक्ति एक निश्चित अवधि के लिए अन्न (भोजन) और जल (पानी) दोनों का पूरी तरह से त्याग कर देता है। उनकी यह तपस्या पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
तपस्या का महत्व…
जैन धर्म में तपस्या को आत्मा की शुद्धि का सबसे महत्वपूर्ण साधन माना गया है। सिद्धि तप एक ऐसी कठोर साधना है, जिसमें साधक लगातार उपवास करता है और अपनी इच्छाओं पर विजय प्राप्त करता है। इसका मुख्य उद्देश्य कर्मों का क्षय करके आत्मा को हल्का और शुद्ध करना है, ताकि वह मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ सके। यह तप न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक दृढ़ता का भी चरम उदाहरण है, जो व्यक्ति को अहंकार और माया से ऊपर उठने की शक्ति देता है।
तपस्या का विवरण…
श्रीमती समीक्षा जैन की 45-दिवसीय तपस्या में 31 उपवास सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं। उनका यह दृढ़ संकल्प सभी के लिए आश्चर्य और श्रद्धा का विषय बना हुआ है। उनकी इस आध्यात्मिक यात्रा में उनके पति श्री अमित जैन और परिवार के सदस्यों का पूर्ण सहयोग रहा है, जो उनके धर्म के प्रति समर्पण को दर्शाता है। यह महान तपस्या 27 जुलाई को पूरी होगी, जब वे पारणे के साथ अपनी साधना का समापन करेंगी।
पूरा जैन समाज इस तपस्वी आत्मा की अनुमोदना करते हुए उनके निर्विघ्न पारणे की कामना कर रहा है।



































