नर्मदा नदी के विभिन्न घाटों जिसमें ग्राम छोटा बड़दा अग्नेश्वर घाट सहित अन्य घाटों पर नवदुर्गा उत्सव की तर्ज पर दशा माता के विसर्जन समारोह में श्रद्धालु उमड़े है।
बड़वानी@टीम भारतीय न्यूज़
दरअसल 10 दिनों तक माता की आराधना ,भक्ति करने के बाद आज नम आंखों से दशा माता का विसर्जन कर रहे हैं,दशा माता की आराधना एक पारंपरिक व्रत है, इस व्रत का उद्देश्य घर की खराब दशा को सुधारना और परिवार के सभी सदस्यों की स्थिति को बेहतर बनाना है। दशा माता को देवी पार्वती का रूप माना जाता है, जो घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाती हैं। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से स्थानीय पुलिस प्रशासन मुस्तैद दिखाई दे रहा है।
इस अवसर पर, श्रद्धालु दशा माता की पूजा करते हैं और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं।
दशा माता की पौराणिक कथा है कि राजा नल और रानी दमयंती से जुड़ी है, जो अपने राज्य में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन जब राजा नल ने दशा माता का अपमान किया, तो उनकी दशा खराब हो गई और वे दरिद्रता का जीवन व्यतीत करने लगे। बाद में, जब उन्होंने दशा माता की पूजा की और क्षमा मांगी, तो उनकी दशा फिर से अच्छी हो गई थी , दशा माता के विसर्जन का महत्व है कि यह व्रत घर की खराब दशा को सुधारता है और परिवार के सभी सदस्यों की स्थिति को बेहतर बनाता है। यह व्रत सुख-समृद्धि और खुशहाली लाता है।



































