शहर काजी वकार सादिक ने बताया कि भारत में अनेक धर्म के लोग एक साथ मिलजुल कर रहते हैं और आपसी त्यौहार मिलजुल कर एक साथ मनाते हैं इस तरह रमजान का महीना और ईद के दिन भी सभी समुदाय के लोग मिलजुल कर इसमें शामिल होते हैं।
धार@साबिर खान fm
मुस्लिम धर्म के लोगों के लिए ईद सबसे बड़ा त्योहार होता है लेकिन इससे पहले उन्हें एक महा उपवास रखना यानी रोजे रखने होते हैं इस महीने को रमजान कहा जाता है इस्लाम धर्म में रमजान सबसे पवित्र और पाक महीना माना जाता है इस महीने इस्लाम में आस्था रखने वाले लोग नियमित रूप से रोज यानी उपवास रखते हैं रमजान इस्लामी कैलेंडर का नवा महीना होता है और इस धर्म में चांद को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है रोजा रखना, अल्लाह की इबादत करना, गरीबों को भोजन करवाना, आपसे मेल मिलाप बनाए रखना इस त्यौहार के विशेषता है, शहर काजी वकार सादिक ने बताएं कि रमजान के महीना में जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं अल्लाह रोजदारों और इबादत करने वालों की दुआ कबूल करता है और इस पवित्र महीने में जीवन में किए गए सारे गुनाहों से निजात भी मिलती है रमजान में मुस्लिम लोगों को बहुत से नियमों का पालन करना पड़ता है रोजा रखने के दौरान सूर्य उदय से लेकर सूर्यास्त कुछ भी नहीं खा पी सकते अरबी में रोजे को सोम कहा जाता है जिसका अर्थ है रुकना ना केवल खाने पीने से बल्कि हर बुरे काम, बुरी सोच, और बुरे शब्दों से भी, इसलिए रोज सिर्फ शारीरिक नहीं है बल्कि एक इंसान के शरीर और रूह का भी रोजा होता है एक जिम्मेदारी है रोजा सबके लिए फर्ज है जिसे रखने से आत्मा की शुद्धि अल्लाह की तरफ पूरा ध्यान और कुर्बानी का अभ्यास होता है यह कठिन परीक्षा है जिसमें की जिसके जरिए अल्लाह की राजा हासिल की जाती है आज रमजान मुबारक 26 व रोज है ने बड़ा रोज है पूरे महीने शहर की तमाम मस्जिदों में जो तरावी की विशेष नमाज होती है इसी दिन यानी की 27 सब कदर को कुरान को मुकम्मल किया जाता है जो नमाज पढ़ने वाले हजरत यानी जो हाफिज होते हैं उन्हें नजराना दिया जाता है इसी के साथ शहर काजी ने यह भी बताया कि इस्लाम धर्म वतन से वफादारी का पैगाम देता है इस्लाम कहता है कि तुम जहां भी रहो अपने वतन से वफादारी करते रहो क्योंकि इस्लाम में वतन से वफादारी ईमान का हिस्सा है इस्लाम कहता है की न सिर्फ रमजान में बल्कि आम दिनों में भी इस बात का ख्याल रखा जाए क्या आपका पड़ोसी किस हाल में है उसके यहां कोई परेशानी तो नहीं है उसके यहां खाने की कोई कमी तो नहीं है इस्लाम कहता है कि अगर आप खा रहे हैं और आपका पड़ोसी भूखा है और आप अपने पड़ोसी का ख्याल नहीं रख रहे हैं चाहे वह किसी भी धर्म हो या जात से संबंधित क्यों ना हो तो फिर आप इस्लाम को अधूरे मानने वाले हैं, अब इसके बाद लगभग तीन या चार दिन में चांद दिखने पर ईद का त्यौहार मनाया जाएगा जिसमें प्रमुख नमाज धार की लाट मस्जिद में ईद के दिन सुबह 9:30 बजे अदा की जाएगी।



































