नए साल की शुरूआत लोकसभा में पारित केन्द्र सरकार के एक कानून के विरोध के साथ हो रही है। दुर्घटनाओं को लेकर कानून बनाया गया है। जिसमें भारतीय ड्राइवर के द्वारा कही भी दुर्घटना होने पर 10 साल की सजा व 5 लाख रुपये जुर्माना का नियम लागू कर दिया हैं।
धार@टीम भारतीय न्यूज़
इस कानून का ड्रायवरों ने विरोध कर दिया है। रविवार को धार में मध्यप्रदेश आॅल ड्रायवर कल्याण संघ प्रदेशाध्यक्ष जीवन परिहार के निर्देशानुसार धार जिला आॅल चालक कल्याण संघ जिलाध्यक्ष महेश चन्द्रवंशी के नेतृत्व में वाहन चालकों ने रैली निकाली और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ड्रायवरों ने इसे काला कानून बताया है। कानून में संशोधन की मांग की जा रहीर है। कानून के विरोध में ड्रायवरों ने वाहन ना चलाने का निर्णय लिया है।
बसों के परिवहन पर संशय
नए कानून को लेकर सभी बड़े वाहन चालकों में नाराजगी देखी जा रही है। धार में ट्रक ड्रायवरों ने अपने-अपने ट्रक खड़े कर दिए है और कानून में संशोधन ना होने तक वाहन ना चलाने की घोषणा की है। इधर ड्रायवरों ने वाहन मालिकों से भी समर्थन मांगा है। धारा में हानेस्ट ड्राइवर एसोसिएशन समिति सदस्य बस यूनियन के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह बुंदेला, सचिव कैलाश तिवारी से मिले। यहां पर अपनी मांगों को लेकर चर्चा की, इसके बाद धार बस यूनियन द्वारा भी ट्रक चालकों की हड़ताल का समर्थन किया है। अध्यक्ष श्री बुंदेला के अनुसार बसों को चलाने के लिए चालक ही नहीं होंगे तो संचालन करने में परेशानी आएगी। पहले चालकों की परेशानी को समझना चाहिए। ऐसे में ट्रक चालकों की इस हड़ताल का समर्थन किया गया है। इसके लिए बस आॅपरेटरों को भी सूचना दी जा रही है। इस तरह की स्थिति के बाद नए साल में यात्री बसों के चलने को लेकर भी संशय बना हुआ है। सभी की नजर इंदौर पर टिकी हुई है। इंदौर से यदि बसें नहीं चलती है तो धार में भी ड्रायवर बस नहीं चलाएंगे।
29 मांगे नहीं मानी, कानून थोप दिया
धार जिला आॅल चालक कल्याण संघ और हानेस्ट एसोसिएशन समिति सहित अन्य ड्रायवरों की संस्थाओं ने केन्द्र सरकार से कानून पर पुनर्विचार की मांग करने एवं संशोधन करने की मांग की है। संघ ने बताया कि पूर्व से 29 सूत्रीय मांगों का निराकरण नहीं किया जा रहा है। इस पर यह कानून थोप दिया गया है। यह सीधे-सीधे पूरे देश के करीब 22 करोड़ वाहन चालकों के साथ अन्याय है। उनकी रोजी-रोटी पर प्रहार है। धार में विरोध प्रदर्शन में ड्राइवर गब्बर मेहरा ,माल सिंह चौहान, दिनेश रघुवंशी, राधेश्याम चन्द्रवंशी, दीपनारायण मिश्रा, अर्जुन सोलंकी, कान्हा सिसौदिया, प्रीतम सिंह, गोविंद, राकेश, जितेंद्र, जयराम परमार, राजेश सोलंकी मौजूद थे।
तनखा 10हजार, जुर्माना 5 लाख
ड्रायवरों की नाराजगी प्रारंभिक तौर पर जायज मानी जा रही है। दरअसल औसत रूप से 10 से 15 हजार रूपए वाहन ड्रायवरों को सिर्फ वेतन के रूप में मिलते है। इससे ही उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। कई मामलों में दूसरे छोटे-बड़े वाहन चालकों की लापरवाही के कारण बड़े वाहनों के साथ दुर्घटनाएं हो जाती है। ऐसी स्थिति में वर्तमान में लागू किए जा रहे नए कानून से ड्रायवरों को ज्यादा नुकसान है। नए कानून में दोष सिद्धी पर 10 साल की सजा और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना रोपित किया जाएगा। ऐसी स्थिति में अल्प वेतन वाले ड्रायवरों के लिए यह कानून किसी मुसीबत से कम नहीं है। इसको लेकर विरोध हो रहा है।



































