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आज फिर शिकायत मिली, इंदौर के एक टूर ऑपरेटर ने उमराह के नाम पर लोगों के साथ धोखाधड़ी की एक हफ़्ते में ये दूसरा केस है, जब उमराह पर जाने वालों को मुम्बई बुला लिया जाता है ना टिकिट बने होते हैं ना ही वीज़ा, एन-वक्त पर टूर ऑपरेटर्स अपने मोबाईल स्विच ऑफ कर लेते हैं, और घर से उमराह की तमन्ना लिये लोग मुसाफिर खाने और एयरपोर्ट पर इंतज़ार में रहते हैं कि टूर वाला टिकिट-वीज़ा हमारे हवाले करे तो हम अपने सफ़र की शुरुआत करें, लेकिन लोगों के एहसासात से फर्जी टूर ऑपरेटर्स को कतई मतलब नही होता, उन पर क्या बीत रही है, वो किस परेशानी से गुज़र रहै हैं उनको कोई एहसास नही होता, उनका ज़मीर तो मर चुका होता है तब ही तो हज, उमराह के नाम पर धोखा धड़ी से ये बाज़ नही आते,
सिर्फ अभी का ही मामला नही है यह, तकरीबन हर साल ही इस तरह फर्जीवाड़े के केस सुनने, देखने को मिलते हैं होता क्या है कुछ नही ? कुछ दिन बीत जाने के बाद सब भूल जाते हैं, फ्रॉड करने वाला अगर पकड़ा भी जाता है और अंदर भी हो जाता है तो कुछ महीनों बाद उसकी ज़मानत हो जाती है, फिर कोई नए नाम से उमराह का टूर शुरू कर देता है,सैकड़ो शिकायतें थानों में दर्ज है, विदेश मंत्रालय की वीज़ा जारी करने की ज़िम्मेदारी, एयरलाइंस एजेंसियों का टिकट में हस्तक्षेप उसके बाद भी कोई एक्शन नही, समझ नही आता ?
उमराह टूर का कोई लायसेंस नही होता, एक बार उमराह करके आ चुका शख्स भी ग्रुप तैयार कर उमराह पर ले जाने को तैयार रहता है, ना कोई तजुर्बा ना कोई तरीका बस उन्हें लगता है अच्छा कमा लेंगे, ख़िदमत का नाम देकर भोले-भाले लोगों को लूटने की यह रिवायत कई सालों से बदस्तूर जारी है,
जितनी गलती टूर वालों की होती है उतनी ही इनके पास बुकिंग कराने वालों की भी होती है, सस्ते के चक्कर मे पड़कर लोग अपना वक्त,पैसा सब गवां देते हैं, लोगों को बेदार करने के लिये ना जाने कितनी बार पम्पलेट, पोस्टर लगाए गए, सोश्यल मीडिया पर पोस्टें चलाई गई, प्रिंट मीडिया के ज़रिए शाया कराया गया, लेकिन लोग तो उधर ही जाते हैं जिधर उनको फायदा दिखता है और फँस जाते हैं फायदे के चक्कर में, उमराह की तैयारी में हर आयटम एवन क्लॉस का चाहिये लेकिन टूर सस्ता होना और अच्छी सहूलियत देने वाला भी चाहिये, क्या किया जाए ? इन टूर्स का बीच मे काम करने वाले लोग टूर की खूब सहूलियत गिनवाकर और इन टूर्स में लोगों की बुकिंग करवाकर कमीशन के नाम पर अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं लेकिन जब टूर दग़ाबाज़ी करता है तब लोगों से यही बीच के लोग नज़रे मिलाने की हिम्मत नही करते उल्टा लोगों को दिलासा देते हैं कि टूर तो ऐसा नही था पता नही ऐसा क्यूँ हो गया ?
सरकार को सख्त होना चाहिये, अब हज-उमराह के नाम पर और धोखे बाज़ी बर्दाश्त नही, इनके खिलाफ सख्त कदम उठाने की ज़रूरत है, जिस तरह हज के लाइसेंस देने में कड़ी खानापूर्ति होती है उसी तरह उमराह के लिये भी कानून बनाए जाएं, गैर लायसेंस धारी टूर्स अगर हज की बुकिंग करता है तो उस पर एफ़.आई.आर.दर्ज होना चाहिये, उमराह पर ले जाने वाले टूर से भी बतौर ज़मानत रकम जमा होना चाहिये ताकि इस तरह की धोखा धड़ी से लोगों को बचाया जा सके, उमराह पर जाने वालों को भी सस्ते के चक्कर मे ना पड़ टूर के पिछले रिकार्ड को देख और मुतमईन होने के बाद ही बुकिंग कराना चाहिये।
मुकीत खान,
चैयरमेन- ऑल इण्डिया हज वेलफेयर सोसायटी.


































