शनिवार को चांद दिखने के साथ ही मुस्लिम धर्मावलंबियों के पवित्र माह रमजान की शुरुआत तराबीह पढ़ने के साथ हुई।
धरमपुरी@जफर अली
आज से पहला रोजा रखा जाएगा। मुस्लिम धर्मावलंबियों के लिए रमजान का महीना काफी खास और पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में मोमिन अल्लाह की इबादत कर रोजा रखते हैं। रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना माना जाता है। इसी महीने में पैगंबर मुहम्मद साहब के सामने इस्लाम की पवित्र किताब का अनावरण हुआ था। इसके बाद से ही इस्लाम में इस महीने को पवित्र माना गया और रोजा रखने की परंपरा शुरू हुई। मोमिनों को इस पवित्र महीने का इंतजार रहता है। रमजान के ठीक बाद ईद उल फितर यानी ईद आती है।
रमजान के दौरान, मोमिनों से उम्मीद की जाती है कि वे अपने आध्यात्मिक स्तर को ऊंचा करें और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव रखें। ऐसे में रमजान के दौरान कुछ नियमों का पालन करना काफी जरूरी होता है।
रमजान के लिए कुछ जरूरी बाते
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, रमजान का महीना पूरे एक माह का होता है । इसकी समाप्ति पर अगले दिन ईद मनाई जाती है। रमजान माह शुरुआत पूरी तरह से चांद पर निर्भर करती है। रमजान का महीना कभी 29 दिन का तो कभी 30 दिन का होता है।
रमजान और रोजा
रमजान के दौरान मुस्लिम धर्मावलंबी पूरे एक महीने तक रोजा रखते हैं। मोमिन इस दौरान सूर्योदय से पूर्व रोजा रखते हैं और सूर्यास्त के बाद इसे खोलते हैं। सूर्योदय से पहले खाना खाते हैं इसे सहरी कहते है, व सूर्यास्त के बाद अजान पढ़ी जाती है जिसके बाद रोजा खोला जाता है. इसे इफ्तार के नाम से जाना जाता है। सभी मोमिनों के लिए रमजान के दौरान रोजा रखना अनिवार्य माना जाता है। सिर्फ नवजात बच्चों, गर्भवती, माहवारी महिलाओ व बीमारों को रोजा ना रखने की छूट होती है।
क्या कहते है अफरोज रज़ा इमाम धरमपुरी
इस्लाम मजहब में रमजान बेहद पवित्र व अल्लाह की रहमतों, बरकतों का महीना है। इस महीने में अल्लाह ने मुसलमानों पर रोजे रखना फर्ज किए हैं। रोजे इस्लाम के पांच बुनियादी सिद्धांतों और सबसे अहम फर्जों में से एक हैं। रोजा हर बालिग मुसलमान पर फर्ज है। इस पूरे महीने रोजे रखें जाते हैं, पांचों वक्त की नमाज अदा की जाती है और दिन अल्लाह की इबादत में गुजरता है। इस महीने की जाने वाली इबादत का 70 गुना सवाब (पुण्य) अन्य महीनों की तुलना ज्यादा मिलता है।






























